यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर
विश्व प्रसिद्ध बस्तर दहशरे के हर रस्म अपने आप।मे खास होती है 75 दिनो तक चलने वाले इस महा पर्व की शुरुआत पाट जात्रा से की जाती है और बस्तर दशहरे के हर रस्म पूरे विधी विधान से निर्विघ्न समपन्न हो इसके लिए मां काछन देवी से अनुमति ली जाती है लगभग 600 सालो से भी अधिक समय से चली आ रही परंपरा को पूरा करने आज भी पूरे लाव लश्कर के साथ बस्तर राजा मां काछन देवी से अनुमती लेने काछन गुड़ी पहुंचते है और माता से आशीर्वाद मांगते है कि बस्तर सहित प्रदेश मे खुशहाली बना रहे और दशहरा बिना विघ्नन के पूरा हो सके हम आपको बता दे कि काछन देवी एक 6 साल की कन्या पर सवार होती है और वह पंनका जाती की होती जिसे रण की देवी कहा जाता है ये पंरपरा सदियो से चली आ रही है और इसे आज भी पूरे विधि विधान के साथ पूरा किया जाता है वंही इसके बाद से बस्तर दशहरे के अलग अलग रस्म को पूरा किया जाएगा।
