शिक्षा विभाग में प्रमोशन की राजनीति या शिक्षकों के साथ छलावा

दीपक विश्वकर्मा

उमरिया – चुनावी मौसम में सूबे के मुखिया अपनी सरकार बचाने के लिये मुफ्त की रेवड़ी कल्चर दिन दूना रात चौगुना लागू करने में कोई कोर कसर नही छोड़ रहे है । वहीं वर्षो से शिक्षा विभाग ने अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षक भी सरकार से कुछ पाने की आस लगाये हुये है । ये शिक्षक वे है जो मुफ्त की नही अपनी वरीयता के हिसाब से सरकार से कुछ पाना चाहते है । परंतु जो उन्हे मिलने की उम्मीद है उसमें में भी अंधा बांटे रेवडी और चीन्ह चीन्ह के दे वाली कहावत चरितार्थ हो रही है । बताते चले कि शिक्षा विभाग में लंबी प्रतीक्षा और अंतराल के बाद या यू कहा जाये कि २०१३ के बाद प्रदेश सरकार २०२३ में शिक्षकों को पदोन्नति देने का मन बनाया है । जिसे उच्च पद पर प्रभार का नाम दिया गया है । यदि जारी की गई प्रमोशन सूची पर दृष्टि डाली जाये तो पूरी लिस्ट ही विसंगतियों से भरी हुई है । उल्लेखनीय है कि सन २०१३ की प्रमोशन लिस्ट में जिन लोगो के नाम शामिल कर उन्हे पदोन्नत किया गया था ऐसे कई शिक्षको के नाम पुन: इस सूची में शामिल किया गया है । यह बात शासकीय शिक्षको को किसी भी तरह से हजम नही हो रही है । ज्ञात हो कि शिक्षा विभाग ने बकायदे प्रमोशन से संबंधित विषय कट आफ जारी किया है । अगर देखा जाये तो विज्ञान संकाय पर विभाग की मेहरबानी स्पष्ट नजर आ रही है । दूसरी ओर कला संकाय आज भी उच्च पद पर पदोन्नति (प्रभार)की बॉट जोह रहा है । सर्वविदित है कि प्रदेश के विद्यालय शिक्षको की कमी से जूझ रहे है ऐसी स्थिति में माध्यमिक शिक्षक से उच्च माध्यमिक शिक्षक के पद पर प्रभार में अर्धशास्त्र की विषय की सबसे दायनीय स्थिति है । ऐसे में इस प्रमोशन को राजनीति कहा जाये या शिक्षको के साथ छलावा इस बात को शिक्षक वर्ग ही अच्छी तरह से समझ सकता है विभाग द्वारा जारी कट आफ यह बात जरूर सामने आ रही है कि शिक्षको के साथ छल / राजनीति या सिर्फ करीबियों को लाभ पहुचाने की कोशिश की जा रही है । ऐसी बाते जनचर्चा में निकल के सामने आई है ।

Express MPCG