नरसिंहपुर
*आशीष कुमार दुबे*
वर्तमान में जनशिक्षक खाली पदों पर प्रतिनियुक्ति कार्यवाही शुरू करने उठ रही मांग
डीपीसी नरसिंहपुर जिले के अधीनस्थ प्रतिनियुक्ति पर आए शैक्षिक समन्वयक का काम कम और अधिकारियों की भूमिका में ज्यादा नजर आने वाले शिक्षको को वापिस शिक्षा विभाग में भेजने और प्रतिनियुक्ति की समीक्षा और समाप्ति की कार्यवाही जिले में वर्षो से ताक पर रख दी गई है। जिले का शिक्षा तंत्र लगातार बेईमानी और लापरवाही भरी कार्यवाहियो के लिए अपनी छवि लगातार धूमिल करता नजर आ रहा है। एक और जहां प्रतिनियुक्ति पर बैठे जिम्मेदार हमले की कार्यशैली की समीक्षा और पात्रता और मापदंडों की प्रतिनियुक्ति अवधि दो वर्ष पुर्ण होने के बाद विवेचना का नियम खुद अमले की नियुक्ति आदेश पर साफ साफ लिखा हुआ है परंतु उसके बारे में ना तो जिले के कलेक्टर ना जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने उनके कार्य का मूल्यांकन,कार्य व्यवहार को परखना उचित नहीं समझा। न ही जिला परियोजना समन्वयक नरसिंहपुर ने ऐसी कार्रवाई को संपन्न करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। जिससे बड़ा गड़बड़झाला और विसंगतियां नित नए तरीके से पैदा होती जा रही हैं ।जहां नियम विरुद्ध तरीके से जमा यह अमला अपनी मनमानिया और गलत कार्य व्यवहार के लिए कुख्यात होता जा रहा है ।वही इस अमले में से कुछ ने लिखित में वापस जाने की दरखास्त भी की है परंतु जिम्मेदार अधिकारी उनके प्रभार समाप्त कर और उन्हें वापस शिक्षा विभाग में भेजने और उनके अध्यापन का लाभ बच्चों तक ना पहुंचाने के विषय में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं ।जिससे शिक्षा विभाग की एक बड़ी खामी उजागर हो रही है ।प्रबुद्ध जन और शिक्षा क्षेत्र में रुचि रखने वाले लोगों और शिक्षा जगत में इससे बड़ा क्षोभ और रोष व्याप्त हो रहा है।
ज़िला शिक्षा केंद्र में प्रतिनियुक्ति की समीक्षा कर नियम विरुद्ध तरीके से जमे अमले को तत्काल हटाने और दोषियों पर कार्रवाई करने बाबत
दूसरी ओर चर्चाओ में गाहेबगाहे यह मांग की जा रही है कि तत्काल प्रभावी तरीके से कार्यवाही करके दोषियों पर कड़ी दंडातमक कार्यवाही हो। नियम विरुद्ध और अवैध तरीके से जमें जनशिक्षक, विकासखंड अकादमिक समन्वयक, प्रभारी और बीआरसी को तत्काल हटाया जाए ।
जोर पकड़ रही चर्चाओ में ज्ञात हुआ है कि वर्ष 2019 में हुई काउंसलिंग के दौरान काफी विसंगतियां व्याप्त रही है। जिनकी पुनः जांच हो और कार्रवाई करके अवैध और नियम विरुद्ध तरीके से प्रतिनियुक्ति पर आए शिक्षकों को वापस दंड देकर भेजा जाए। इसमें निर्धारित आयु सीमा पार करने के बावजूद भी गलत तरीके से जॉइनिंग दी गई। इसी प्रकार सामाजिक विज्ञान से अध्यापक पदोन्नति प्राप्त शिक्षकों को विकासखंड अकादमिक समन्वयक हिंदी विषय से बनाया गया। उसके अलावा भी जो जनशिक्षक काउंसलिंग में सम्मिलित ही नहीं हुए उन्हें भी बाद में सेंटिंग करके जनशिक्षक के रूप में प्रतिनियुक्ति देने की कार्यवाही गुपचुप तरीके से की गई।
कहा जा रहा है कि पिछली काउंसलिंग और प्रतिनियुक्ति के 2 वर्ष पूर्ण होने के उपरांत अमले की पुनर्नियुक्ति बढ़ाने के पूर्व पात्रता और मापदंड के साथ कार्य व्यवहार की समीक्षा होनी थी। जो आज दिनांक तक नहीं हुई और इस वजह से आयु सीमा पार कर चुका अमला जनशिक्षक, बीएसी, बीआरसी की प्रतिनियुक्ति पर जमा हुआ है।इससे कई सारे संदेह उपज रहे हैं।
एक नई बात भी सामने आई है कि वर्तमान में उक्त प्रतिनियुक्ति के लिए खाली पदों को भरने के लिए जिला शिक्षा केंद्र के लिए कार्यवाही शुरू करने राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल से एक महीने पूर्व आदेश जारी किया गया है परंतु जिला परियोजना समन्वयक कार्यालय द्वारा अभी तक इस ओर कोई भी कदम नहीं उठाया गया है।राज्य स्तर के आदेश का खुद उनका मातहत महकमा खुला उल्लंघन करते दिखाई दे रहे हैं।अतः मांग की जा रही है कि कारवाही तत्काल शुरू करके पर्याप्त वरिष्ठता और योग्यता धारी शिक्षकों के ओपन काउंसलिंग के तहत प्रतिनियुक्ति की कार्यवाही की जाए जिससे जूनियर अमले से नवनियुक्त और 2014-15 के माध्यमिक शिक्षकों को 25 30 साल पुराने काफी सीनियर अमले की मॉनिटरिंग के अधिकार देना सीनियर और जूनियर के नियमों का मखौल उड़ाना है। ऐसी स्थिति का जिले में खात्मा हो सकें।
