
रिपुदमन सिंह बैस
सुकमा–कभी गोलियों की तड़तड़ाहट और बम के धमाकों से दहलने वाला बस्तर संभाग का घोर नक्सल प्रभावित जिला सुकमा अब धीरे-धीरे विकास की ओर अग्रेषित हो रहा है बिजली पानी सड़क शिक्षा स्वास्थ्य जैसे बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते वाला जिला सुकमा अब धीरे-धीरे विकास की नई गाथा रचित कर रहा है और नक्सल प्रभावित इलाकों में बसे आदिवासी बाहुल्य लोगों के लिए जहां सड़कों ने विकास के रास्ते खोले शिक्षा ने नई इबारत लिखी वहीं अब बिजली विभाग द्वारा लोगों के जीवन में रोशनी भरकर जिंदगी आबाद किया है
7 ग्राम पंचायत में नहीं थी बिजली क्रेडा ने कुछ घर किए थे रोशन
342 परिवार आदिवासियों की बसाहट घोर नक्सल प्रभावित 7 ग्राम पंचायतें डब्बाकोंटा, पिड़मेल, एकलगुडा, दुरामांगु, तुमबांगु, सिंगनपाड एवं डोकपाड कभी बिजली ही नहीं थी प्रभावित क्षेत्र दिया सलाई की जिंदगी जी रहा था क्रेडा विभाग ने अपनी पहुंच वाले कुछ क्षेत्रों में घरों को रोशन करने की कोशिश की थी मगर अधिकांश घर अंधेरे में डूबे थे खेती किसानी या बिजली संबंधी कोई भी कार्य नहीं होने पर यहां की बसाहट के लोगों को आधुनिक ने युग में जीवन बिताना किसी परिकल्पना से कम नहीं था मगर बिजली विभाग की सक्रिय भूमिका के चलते और प्रशासनिक महकने ने मामले की गंभीरता को समझते हुए एक महत्वपूर्ण ठोस कदम उठाया और घोर नक्सल प्रभावित घने जंगलों में बसे 342 परिवारों के जीवन रोशन से आबाद कर दिया खेती के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे गांव डिजिटल हो पाएगा
अति संवेदन सील इलाकों में अंतिम व्यक्ति तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना शासन प्रशासन की पहली प्राथमिकता है 7 गांव रोशन हुए हैं जहां मूलभूत सुविधाएं नहीं ऐसे गांव को चिन्हित कर वहां बिजली पानी सड़क शिक्षा स्वास्थ्य पहुंचने की पुरजोर कोशिश की जाएगी।
जंगलों में बसे गांव रोशन हुए सैकड़ो आदिवासी बहुल परिवार के जीवन को एक नई दिशा मिलेगी रोशनी से इस विषय पर दूरभाष पर चर्चा करते हुए बस्तर के आंचल में को विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता जोसेफ केरकेट्टा ने बताया कि अति संवेदन सील नक्सलाइट एरिया पर काम करना किसी चुनौती से कम नहीं था मगर शासन प्रशासन के सहयोग से और फोर्स की मदद पर यह संभव हो पाया है बिजली मिलने पर घने जंगलों में बसे इन लोगों के लिए विकास के रास्ते खुलेंगे आधुनिकता से लोग जुड़ने लगेंगे साथ ही साथ युवाओं को रोजगार का अवसर भी मिलेगा ।
