पीजी कालेज कांकेर में मिलेट एवं पारम्परिक व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन


यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर

कांकेर। भानुप्रतापदेव शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कांकेर के समाजशास्त्र विभाग द्वारा महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सरला आत्राम के मार्गदर्शन एवं विभागाध्यक्ष डॉ. व्ही. के. रामटेके के निर्देशन और डॉ. बसंत नाग के नेतृत्व में एवं पुनित राम उड़के के सहयोग से मिलेट एवं पारम्परिक व्यंजन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस विभाग के द्वारा हमेशा नवाचार किया जाता है। सैद्धांतिक ज्ञान की अपेक्षा व्यावहारिक ज्ञान को अधिक महत्व दिया जाता है। परम्परागत व्यंजनों के संरक्षण हेतु अन्य लोगों को पारम्परिक स्वाद, पोषकता की जानकारी देकर अपनी परम्परा और संस्कृति का हस्तारण करने के लिये प्रोत्साहित करने हेतु इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 13 प्रतिभागियों ने अपनी सहभागिता की है। कु. नंदिनी शौरी, सुरेन्द्र कुमार जुर्री, कु. निकिता यादव, कु. पौरवी साहू, कु. गीतांजली नेताम, कु. प्रोति गोटी, कु. कामांक्षा सुद्दलवार, कु. धारणा साहू, कु. रीना कुंजाम, कु. अर्चना पडोटी, कु. लिली उइके, कु. पूजा कुंजाम, कु. विद्या कुंजाम। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य ने विद्यार्थियों एवं समाजशास्त्र विभाग के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा है प्रयास निसंदेह ही अविश्मरणीय है। मोटे अनाज खाने से शरीर को आवश्यक मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त होते है। प्राचीन काल में इनके प्रयोग से लोग स्वस्थ्य रहते थे। ग्लोटन की होने के कारण यह वजन नियंत्रण, डाइबिटीज, ब्लड प्रेशर एवं अन्य बीमारियों को रोकने में सहायक है। अतः इनको अपने दैनिक जीवन के भोजन में शामिल करके स्वस्थ्य रह सकते है। डॉ. एस. आर. बंजारे ने रागी, कोदो, कुटकी, बाजरे के फायदे के बारे में जानकारी प्रदान की। डॉ. लक्ष्मी काम ने पारम्परिक व्यंजनों के संदर्भ में अपनी बाते रखी। डॉ. व्ही. के. रामटेके ने कहा की मिलेट में कैलोरी कम होती है इनके सेवन से पाचन संबंधी समस्या दूर होती हैं। पहले इनकी खेती जाती थी लेकिन अब विलुप्त होने के कगार पर है। इनको संरक्षित करने के लिये लोगों को जागरूक करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बसंत नाग के द्वारा किया गया उन्होंने बताया कि आधुनिकता के इस दौर में हम फास्ट फुड को और आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन जो स्वाद पारम्परिक व्यंजनों में है वह अन्य व्यंजनों में नहीं है क्योंकि वह प्राकृतिक होता है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक भी है इनमें पाये जाने वाले पोषक तत्व फाइबर, प्रोटिन, फोलेट, आयरन, अमिनो एसिड एंटी एजिंग का काम भी करती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। इस कार्यक्रम में डॉ. एल. आर. सिन्हा, डॉ.आर. कुलदीप, प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिन्हा, प्रो. सुमिता पाण्डे, प्रो. अलका केरकेट्टा, प्रो. आशीष नेताम, प्रो. ऋचा संगने, दीपक निषाद सहित महाविद्यालय के अन्य प्राध्यापक एवं सुरेन्द्र कुमार जुर्री कुंदन निषाद, रवि मरकाम, कु. ज्योति, कु. काजोल गोटा, कु. दरूणा जैन, मनीष कुंजाम, हिमांशु पुरी, कु. प्रिंयका तरूण कुमार सलाम एवं अन्य बडी संख्या में छात्र-छात्राये उपस्थित रहें। इस कार्यक्रम में निर्णायक के रूप में डॉ. एस. आर. बंजारे, डॉ. लक्ष्मी लेकाम, डॉ. आर. कुलदीप, प्रो. सुरेन्द्र कुमार सिन्हा उपस्थित रहे। प्रथम स्थान पर कु. नंदिनी शोरी एम. ए. तृतीय सेमेस्टर समाजशास्त्र दूसरे स्थान पर कु. कामांक्षा सुद्दलवार, प्रथम सेमेस्टर समाजशास्त्र एवं तृतीय दान पर कु धारणा साहू, प्रथम सेमेस्टर समाजशास्त्र ने प्राप्त किया। इन विद्यार्थियों ने अपने प्रस्तुति करण को भी पारम्परिक स्वरूप प्रदान कर इस प्रतियोगिता को गरिमा प्रदान की है। इस प्रतियोगिता में रागी, कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा का प्रयोग कर हलवा, टेटरी, खुर्मी, गुजिया, फरा, अरसा खीर, तस्मई, सोआरी, बड़ा, चौसेला, पान रोटी जैसे पारम्परिक व्यंजन बनाये गये।

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