चंद्रहास वैष्णव 
छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ (शाखा जिला-बस्तर) ने अधीक्षक संवर्ग की वर्षों से लंबित समस्याओं और छात्रावास-आश्रमों के संचालन में आ रही विसंगतियों के विरोध में आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। संघ ने बस्तर कलेक्टर के माध्यम से आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव को ज्ञापन सौंपकर चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। इसके तहत 12 नवंबर 2026 (गुरुवार) को जिला मुख्यालय में एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि मांगों के निराकरण के बजाय दंडात्मक कदम उठाए गए, तो नियमित एवं प्रभारी अधीक्षक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
##कार्य के घंटे और अवकाश का निर्धारण न होने से असंतोष##
संघ ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि अधीक्षकों से 24×7 सशरीर उपस्थित रहने की अपेक्षा की जाती है, जो कि पूरी तरह अव्यावहारिक है। इसके स्थान पर कार्य की प्रकृति के अनुसार ड्यूटी आवर्स तय करने और उसके बाद केवल ‘ऑन-कॉल’ उपलब्धता का प्रावधान करने की मांग की गई है। इसके अलावा अधीक्षकों के लिए साप्ताहिक व सार्वजनिक अवकाश, महिला अधीक्षिकाओं के परिजनों के परिसर में निवास के स्पष्ट दिशा-निर्देश और सामान्य शासकीय आवास नियमों से भिन्न होने के कारण गृह भाड़ा भत्ता (HRA) देने की मांग शामिल है।
##पदोन्नति का अभाव और कैडर पुनर्गठन की मांग##
ज्ञापन के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में अधीक्षक पद पर नियुक्त कर्मचारी पूरी सेवा उसी पद पर रहकर सेवानिवृत्त हो जाते हैं। कर्मचारियों को करियर ग्रोथ के अवसर प्रदान करने हेतु मंडल संयोजक, क्षेत्र संयोजक एवं सहायक सांख्यिकी अधिकारी जैसे विभागीय पदों पर पदोन्नति देने और कैडर पुनर्गठन की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। इसके साथ ही विद्यालयीन शिक्षण के साथ छात्रावास की अतिरिक्त जिम्मेदारी निभा रहे शिक्षक संवर्ग के प्रभारी अधीक्षकों को VSK ऐप से उपस्थिति दर्ज करने की अनिवार्यता से छूट देने की मांग की गई है, ताकि दोनों दायित्व प्रभावित न हों।
##ऑनलाइन व्यवस्था की विसंगतियां और मेस राशि में कटौती पर रोष##
संघ ने HMS पोर्टल द्वारा मेस राशि में की जाने वाली कटौती को अव्यावहारिक बताया है। संघ का कहना है कि 50 से 100 विद्यार्थियों के भोजन की तैयारी में गैस, मसाले और ईंधन का खर्च 2-3 बच्चों की गैरहाजिरी से कम नहीं होता। इसलिए न्यूनतम 24 दिन की उपस्थिति पर पूरा मेस बजट स्वीकृत किया जाए तथा विद्यार्थियों के 30 दिनों के मेडिकल अवकाश का प्रावधान HMS पोर्टल पर भी लागू हो। साथ ही जब तक छात्रावासों में कंप्यूटर, इंटरनेट और ऑपरेटर उपलब्ध नहीं कराए जाते, तब तक ऑनलाइन हाजिरी की अनिवार्यता शिथिल रखी जाए और सर्वर खराबी के लिए अधीक्षकों को जिम्मेदार न ठहराया जाए।
##आवश्यक बजट व संसाधनों की कमी से जूझ रहे छात्रावास##
आश्रम और छात्रावासों के सुचारू संचालन के लिए पर्याप्त बजट समय पर जारी करने की मांग की गई है, जिसमें बर्तन, सफाई सामग्री, विद्यार्थियों की दवाएं, प्राथमिक उपचार, राज्योत्सव व राष्ट्रीय पर्वों की प्रकाश व्यवस्था तथा सामग्री परिवहन का व्यय शामिल है। अधीक्षकों का कहना है कि पर्याप्त बजट के अभाव में उन्हें निजी धन पर निर्भर रहना पड़ता है। संघ ने शासन से इन मांगों पर समयबद्ध और न्यायसंगत निर्णय लेने का आग्रह किया है।
