मलेरिया से छात्र की मौत के बाद आश्रम अधीक्षक निलंबित आश्रम में गंदगी और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बरती गई लापरवाही जांच में उजागर, कलेक्टर-डीईओ की रिपोर्ट के बाद शिक्षा विभाग की कार्रवाई

मलेरिया से छात्र की मौत के बाद आश्रम अधीक्षक निलंबित

आश्रम में गंदगी और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बरती गई लापरवाही जांच में उजागर, कलेक्टर-डीईओ की रिपोर्ट के बाद शिक्षा विभाग की कार्रवाई

कांकेर। कांकेर जिले के बालक आश्रम मरदापोटी में मलेरिया से छात्र की मौत के मामले में शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में आश्रम की साफ-सफाई, बच्चों के स्वास्थ्य और शासकीय सामग्री के रखरखाव में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद प्रभारी छात्रावास अधीक्षक एवं उच्च श्रेणी शिक्षक यशवंत गुना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बस्तर, जगदलपुर द्वारा जारी आदेश क्रमांक 4092/संयु.संचा./शिकायत-जाँच/2025-26 के अनुसार यह कार्रवाई जिला शिक्षा अधिकारी कांकेर की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।

जांच में सामने आई गंभीर लापरवाही

जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में आश्रम परिसर में साफ-सफाई और स्वच्छता की उचित व्यवस्था नहीं होने, शासकीय सामग्रियों के रखरखाव में लापरवाही बरते जाने तथा आश्रम में रहने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की समुचित देखभाल नहीं किए जाने की बात सामने आई।

जांच के दौरान कई बच्चे मलेरिया सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित पाए गए। रिपोर्ट में कक्षा चौथी के छात्र सुभाष कुमेटी के मलेरिया से पीड़ित होने और उसकी समुचित देखभाल नहीं किए जाने का भी उल्लेख है। छात्र की 26 जुलाई 2026 को मौत हो गई थी।

आचरण नियमों के उल्लंघन का आरोप

आदेश में प्रभारी अधीक्षक की लापरवाही को शासकीय कार्य के प्रति गंभीर उदासीनता मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत बताया गया है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम-9 के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है।

कोयलीबेड़ा-पखांजूर रहेगा मुख्यालय

निलंबन अवधि में यशवंत गुना का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कोयलीबेड़ा-पखांजूर, जिला उत्तर बस्तर कांकेर निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।

छात्र की मौत और जांच में सामने आई व्यवस्थागत खामियों के बाद जिले के आश्रम-छात्रावासों में स्वच्छता, स्वास्थ्य निगरानी और विद्यार्थियों की समय पर चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।