शालीनता से प्रशासन, संकल्प से विकास… 16 माह में बालोद की प्रशासनिक तस्वीर बदलने में जुटीं कलेक्टर दिव्या 19 अप्रैल 2025 को संभाली जिले की कमान, सुशासन, जनहित, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और विकास कार्यों को दी प्राथमिकता; संवेदनशीलता के साथ सख्त फैसले लेने की कार्यशैली बनी पहचान-

विनोद जैन

बालोद। प्रशासनिक पद पर रहते हुए संवेदनशीलता, सहजता और दृढ़ इच्छाशक्ति का संतुलन कायम रखना आसान नहीं होता। लेकिन बालोद जिले की कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने करीब 16 माह के कार्यकाल में अपनी कार्यशैली से इस संतुलन की मिसाल पेश की है। 19 अप्रैल 2025 को बालोद कलेक्टर के रूप में पदभार संभालने के बाद से उन्होंने प्रशासनिक कामकाज को शालीनता और गंभीरता के साथ आगे बढ़ाते हुए जिले के विकास और जनहित को प्राथमिकता दी। उनकी कार्यशैली में जहां आम लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता नजर आई, वहीं अधिकारियों से समय-सीमा में काम कराने और योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही नहीं बरतने का स्पष्ट संदेश भी दिखाई दिया।

सुशासन को बनाया कार्यशैली का आधार-
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने शासन की योजनाओं को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय उनका वास्तविक लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर जोर दिया। सुशासन तिहार सहित विभिन्न अभियानों के दौरान उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा कर लंबित प्रकरणों और जनसमस्याओं के निराकरण पर विशेष ध्यान दिया। नियमित समीक्षा बैठकों के साथ मैदानी निरीक्षण को भी प्रशासनिक कार्यशैली का अहम हिस्सा बनाया गया। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी करने, समय-सीमा में कार्य पूरा करने और जनसमस्याओं के समाधान में संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए। इससे प्रशासनिक मशीनरी में सक्रियता और जवाबदेही बढ़ाने का प्रयास हुआ।

विकास कार्यों को गति, गुणवत्ता से समझौता नहीं-
बालोद जिले में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, ग्रामीण विकास और अधोसंरचना से जुड़े विषय लगातार उनकी प्राथमिकता में रहे। विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर उनका रुख स्पष्ट रहा है। निर्माण कार्यों में कमी अथवा गुणवत्ता संबंधी शिकायत सामने आने पर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, ग्रामीण स्वच्छता और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर भी प्रशासन का विशेष जोर रहा। उनका प्रयास रहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और सरकारी योजनाओं का असर गांवों और कस्बों में दिखाई दे

शिक्षा व्यवस्था पर विशेष फोकस-
जिले की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कलेक्टर ने लगातार समीक्षा की। विद्यालयों की स्थिति, शिक्षकों की उपलब्धता, परीक्षा परिणाम और शैक्षणिक गुणवत्ता जैसे विषयों पर प्राचार्यों एवं शिक्षकों के साथ बैठक कर सुधार के लिए कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया। बेहतर परीक्षा परिणाम के लिए पूरे शैक्षणिक सत्र में योजनाबद्ध तरीके से काम करने की आवश्यकता बताई गई। शिक्षकों की कमी वाले विद्यालयों में वैकल्पिक व्यवस्था के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। इससे शिक्षा व्यवस्था को केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित रखने के बजाय उसकी गुणवत्ता सुधारने की दिशा में प्रयास दिखाई दिया।

स्वास्थ्य सेवाओं में भी लगातार निगरानी-
जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में भी प्रशासन ने विभिन्न योजनाओं और अभियानों की समीक्षा को प्राथमिकता दी। मलेरिया नियंत्रण अभियान में जिले को सकारात्मक परिणाम मिले। जनवरी से जून 2026 के दौरान मलेरिया के मामलों में कमी दर्ज होना स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता और जागरूकता अभियान की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। इसके अलावा आयुष्मान कार्ड केवाईसी, स्वास्थ्य शिविरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच जैसे विषयों पर भी लगातार निगरानी रखी गई। उद्देश्य यही रहा कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंच सके।

एक पेड़ महतारी के नाम’ बना जनभागीदारी का अभियान-
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में ‘एक पेड़ महतारी के नाम’ अभियान भी कलेक्टर के कार्यकाल की उल्लेखनीय पहल रही। पौधरोपण को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय इसे महिलाओं, जनप्रतिनिधियों, विद्यार्थियों, अधिकारियों और आम नागरिकों की भागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया गया। करीब ढाई लाख महिलाओं की भागीदारी के लक्ष्य के साथ चलाए गए अभियान में पौधरोपण के साथ पौधों की देखभाल और संरक्षण पर भी जोर दिया गया। इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को जनअभियान का स्वरूप देने की कोशिश की गई।

मैदानी निरीक्षण से बढ़ी जवाबदेही-
कलेक्टर की कार्यशैली में मैदानी निरीक्षण का विशेष स्थान रहा। स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, पेयजल व्यवस्था, निर्माण कार्य और सरकारी योजनाओं की जमीनी स्थिति जानने के लिए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण किया। मौके पर कमियां मिलने पर संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। उनकी यह कार्यशैली इस बात का संकेत रही कि प्रशासन केवल कार्यालयीन बैठकों तक सीमित न रहे, बल्कि वास्तविक स्थिति को मौके पर जाकर समझे और उसके अनुरूप निर्णय ले।

शालीनता के साथ सख्त फैसले-
कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की सबसे अलग पहचान उनकी शालीनता और प्रशासनिक दृढ़ता का संयोजन रही है। आम नागरिकों से संवाद में सहजता और अधिकारियों के साथ समीक्षा में स्पष्टता उनकी कार्यशैली के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। आवश्यकता पड़ने पर उन्होंने गुणवत्ता और नियमों से समझौता नहीं करने का संदेश भी दिया।

काम बोले’ की कार्यशैली-
19 अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक के सफर को देखें तो उनकी कार्यशैली में एक बात स्पष्ट दिखाई देती है—प्रचार से अधिक काम और औपचारिकता से अधिक परिणाम। ग्रामीण बहुल बालोद जिले में विकास की जरूरतें और चुनौतियां दोनों बड़ी हैं। ऐसे में सीमित संसाधनों के बीच विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और योजनाओं की निगरानी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कलेक्टर ने प्रशासन को अधिक सक्रिय और जनोन्मुख बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किया। उनके कार्यकाल की पहचान संवेदनशीलता, सहज संवाद, नियमित समीक्षा, मैदानी निगरानी और जरूरत पड़ने पर सख्त निर्णय लेने की क्षमता के रूप में उभरकर सामने आई है।