*प्रशासकीय-वित्तीय स्वीकृति मना रही एक महीना, ‘साहेब’ ने पीआईसी के फैसलों का निकाला ‘जनाजा’*

 

विनोद जैन

बालोद नगर पालिका की प्रेसीडेंट-इन-काउंसिल की बैठक को एक माह हो गया इस काउसिल के माननीय सदस्यों को लगता होगा कि शहर की सरकार वही चला रहे हैं। लेकिन निकाय प्रशासन ने उनकी इस गलतफहमी को बड़ी बेरहमी से दूर कर दिया है।

पीआईसी निर्णय लेती रह गई और ‘साहेब’ ने उनके आदेशों की ऐसी धज्जियां उड़ाईं कि उसकी धमक दूर तक सुनाई दे रही है।

पूरे 30 दिन यानी एक महीना बीत चुका है जब बड़े जोर-शोर से एलम खरीदी को ‘प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति’ का पवित्र आशीर्वाद मिला था। उम्मीद थी कि नियम अनुसार टेंडर जारी होगा, पारदर्शी प्रक्रिया होगी।

लेकिन ‘साहेब’ ने तय कर लिया है— “कौन टेंडर के झंझट में पड़े, कौन हफ्तों का इंतजार करे? जनता के पानी को साफ करना है, तो नियमों को थोड़ा मैला करने में क्या हर्ज है!”

जब नीयत साफ हो, तो टेंडर की क्या जरूरत? ‘साहेब’ ने बिना किसी औपचारिकता के सीधे बाज़ार का रुख किया और पूरे 13 टन एलम खरीद डाले। वह भी ₹39 की मनमाफिक दर पर!