सुकमा में स्वास्थ्य विभाग के भीतर बड़ा विवाद, CMHO पर आदिवासी महिला कर्मचारी ने लगाए उत्पीड़न के गंभीर आरोप

चंद्रहास वैष्णव

सुकमा।
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में स्वास्थ्य विभाग उस समय विवादों में घिर गया, जब यहां पदस्थ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आर. के. सिंह पर एक आदिवासी महिला स्वास्थ्य कर्मचारी ने मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए। मामला सामने आते ही प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है, वहीं आदिवासी समाज और कर्मचारी संगठनों में भी गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है।

क्या है पूरा मामला
पीड़िता, जो कोंटा ब्लॉक में स्वास्थ्य कर्मचारी के रूप में पदस्थ है, ने जिला कलेक्टर को सौंपे गए अपने शिकायती पत्र में बताया कि 21 अगस्त 2025 को उसे अचानक कोंटा से जिला मुख्यालय सुकमा अटैच करने का आदेश दिया गया। आरोप है कि अटैचमेंट के बाद उसे कोई स्पष्ट विभागीय कार्य नहीं दिया गया। इसके बजाय सीएमएचओ द्वारा उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और शारीरिक उत्पीड़न किया गया।
महिला कर्मचारी का कहना है कि उसे बिना वजह घंटों कार्यालय में बैठाकर रखा जाता था और उस पर अनुचित दबाव बनाया जाता था, जिससे उसके आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंची है।

प्रशासनिक कार्रवाई और जांच
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए सुकमा जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। कलेक्टर के निर्देश पर मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने की FIR की मांग
मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। आदिवासी नेता और पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने इसे बेहद गंभीर बताते हुए आरोपी अधिकारी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि, “एक आदिवासी महिला कर्मचारी के साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह पद की गरिमा का दुरुपयोग है। प्रशासन को चाहिए कि जांच के नाम पर देरी करने के बजाय सीधे कानूनी कार्रवाई करे।”

अधिकारी का पक्ष सामने नहीं आया
मामले की वास्तविकता जानने के लिए जब बस्तर फाइल्स वेब पोर्टल की टीम ने बुधवार शाम 17 दिसंबर को CMHO डॉ. आर. के. सिंह से मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। वहीं पीड़िता ने भी फिलहाल कैमरे के सामने कुछ भी कहने से परहेज किया है।

उठते सवाल
इस घटना ने सुकमा जिले में सरकारी कार्यालयों में महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न (POSH) नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर किस आधार पर एक महिला कर्मचारी को बिना स्पष्ट कार्य के महीनों तक जिला कार्यालय में अटैच कर रखा गया।

मामले की जांच जारी है और अब सबकी नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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