स्कूली वाहनों में जानवरों की तरह ठूसे जा रहे हैं बच्चे स्कूल तक लाया और ले जाया जा रहा परिवहन विभाग कुंभकरणी नींद से कब जागेगा कब होगी इन पर कार्यवाही यातायात प्रशासन बना अंजान

दीपक विश्वकर्मा

उमरिया जिले के पाली में बच्चों की जान जोखी में डालकर उन्हें पढ़ने भेजा जा रहा है प्रशासन के नियमों की धज्जियां सरेआम उड़ाई जा रही है स्कूल में लगे निजी वाहनों में 20 से 22 बच्चों को ठूस ठूस कर भरकर स्कूल से लाया ले जाया जा रहा है यहां अभिभावकों के साथ विद्यार्थियों का भी शोषण करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे
यहां यातायात विभाग के नियमों को तक में रखकर मनमानी की जा रही स्कूल वाहन में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठने पर ना तो अभिभावक ध्यान दे रहे हैं और ना ही शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ऐसे में रोजाना बच्चे अपनी जिंदगी दाव पर लगाकर पढ़ाई करने को मजबूर है ना निजी वाहनों में स्कूल का नाम ना पीली पट्टी और ना ही फर्स्टटेड की व्यवस्था ना वाहन मालिक और ड्राइवर का फोन नंबर यहां तक की निजी वाहनों में बैठने तक की व्यवस्था उन बच्चों के लिए नहीं है सिट को निकाल कर लकड़ी के पट्टे को बैठने की व्यवस्था बनाई गई है ताकि उन पर ज्यादा बच्चे आ सके
यही परिवहन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है खैर किसी को क्या करना
यहां सीधा-सीधा परिवहन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है स्कूली वाहनों में आने-जाने वाले बच्चे किस हालत में अपने घर और स्कूल को जाते हैं इस बात की जानकारी अभिभावकों को भी नहीं रहती इसका फायदा निजी वाहन वाले उठाते हैं और बच्चों को वाहनों में ठूस ठूस कर भरते हैं।

अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद क्या परिवहन विभाग जागता है या यूं ही कुंभ करनी नींद में सोता रहेगा

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