उमरिया जिला
दीपक विश्वकर्मा
उमरिया….भारत के श्रमिक व किसान आज बेहाल
है। फिर चाहे वे खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत कर जनता के पेट में अन्न पहुंचाने वाला किसान हो या फिर फैक्ट्री, दफ्तर, सड़क, बिल्डिंग, बस-ट्रक-आटो या फिर घर-घर मेहनत करने वाला मजदूर हो, देश के लिए संपदा पैदा करने वाली मेहनतकश जनता-किसान व मजदूर आज बेहाल है। न उत्पादित अनाज का उचित मूल्य मिल रहा है और न मेहनत की कीमत। इन सब के ऊपर दिनों-दिन बढ़ती महंगाई की मार ने आम जनता की कमर तोड़ रखी है।
तीनों कृषि विरोधी काले कानूनों की वापसी के लिए, दिल्ली के 6 बॉर्डर्स पर 13 महीने तक चलाए गए ऐतिहासिक किसान आंदोलन में सात सौ से ज्यादा किसान साथी शहीद हो गए। तीनों कृषि विरोधी काले कानून वापस हुए। ऐतिहासिक किसान आंदोलन की जीत हुई। उस समय किसानों से किए गए वायदे एमएसपी पर फसल खरीदी की गारंटी का कानून बनाने, आंदोलन के दौरान लगाए गए मुकद्दमें वापिस लेने सहित सभी वायदे आज भी पूरे नहीं हुए हैं। किसान कर्ज के बोझ तले दबे हुए है और उत्पाद का उचित मूल्य न मिलने से बेहाल है, जिसके कारण आत्महत्या करने को बाध्य हो रहे है।
केंद्र की सरकार कॉर्पोरेट परस्त नीतियों को लागू करने पर आमादा है। तीसरी बार सत्ता में आते ही चार श्रम संहिताओं को लागू करने पर जोर डाला जा रहा है। 100 दिन की कार्ययोजना के नाम पर कॉर्पोरेट्स को मुनाफा पहुंचाने के लिए आदेश दिए जा रहे है। निश्चित अवधि के रोजगार (फिक्स टर्म एम्प्लॉइमन्ट), श्रम के केज्यूअलकरण(अस्थायीकरण), स्थायी कामों का अंधाधुंध ठेकाकरण, स्थायी पदों की कटौती, सरकारी पदों को भरने में हो रही अक्षम्य कोताही, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, सरकारी विभागों का अंधाधुंध निजीकरण तथा राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) के जरिए पिछले दरवाजे से निजीकरण के जरिए श्रमिकों के अधिकारों पर सीधा हमला हो रहा है। स्वीकृत पदों को नहीं भरे जा रहे है जिससे बेरोजगारों के लिए रोजगार पैदा होने के अवसर में भारी ह्रास हो रहा है। सामाजिक सुरक्षा जैसे पेंशन आदि पर हमला हो रहा है। कर्मचारियों की भारी मांग के बावजूद पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की जगह सरकार पेंशन योजना का नाम बदलकर जनता को भरमा रही है।
खनिजों और धातुओं के खनन पर मौजूदा कानून के जरिए खदान श्रमिकों के साथ साथ क्षेत्र के आदिवासियों और किसानों के अधिकारों पर हमला हो रहा है।
इन सबके साथ मध्यप्रदेश में न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण में भारी घोटाले किए जा रहे है तथा श्रमिकों के साथ अन्याय हो रहा है। 2019 से देय न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण को 2024 मे किया गया वह भी बगैर एरियर्स के। उसके बाद उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश के बहाने उसे फिर घटा दिया गया। न्यूनतम वेतन कानून के अनुसार अक्टूबर 2024 से देय पुनः नया न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण देय हो चुका है। इस पूरी स्थिति में प्रदेश के प्रत्येक श्रमिक को लाखों का नुकसान हुआ है जिसके चलते मालिकों द्वारा हजारों करोड़ रुपये हड़प लिए गए है।
श्रमिकों और किसानों के विभिन्न वर्ग और जनता के अन्य हिस्से पहले से ही केंद्र सरकार की विनाशकारी नीतियों के खिलाफ कई मोर्चों पर संघर्ष कर रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में संयुक्त किसान मोर्चा व ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मोर्चा ने लोगों के बीच सघन अभियान और उपरोक्त मांगें पूरी होने तक तीव्र संघर्ष के माध्यम से एकजुट होकर ऐतिहासिक जिम्मेदारी लेने का संकल्प दोहराया है। ट्रेड यूनियनों/ फेडरेशनों/एसोसिएशनों और संयुक्त किसान मोर्चा का साझा मंच संयुक्त और समन्वित कार्रवाइयों को जारी रखते हुए संयुक्त रूप से जमीनी स्तर पर कार्रवाई कर रहा है। इसके तहत आज 26 नवंबर 2024 को सम्पूर्ण देश के मजदूरों और किसानों के साथ मध्यप्रदेश के श्रमिक व किसान विरोध कार्रवाई कर रहे है। आज सभी जिला मुख्यालयों में प्रदर्शन पश्चात हम यह ज्ञापन आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे है।
हमारी मांग हैं कि :
1. मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण किया जाए; खाद्य, दवा, कृषि-इनपुट और मशीनरी जैसी आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी हटाओ; पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में पर्याप्त कमी की जाए।
2. कोविड के बहाने वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, दिव्यांग व्यक्तियों, खिलाड़ियों को रेलवे रियायतें वापस ली गईं, उन्हें बहाल किया जाए।
3. खाद्य सुरक्षा की गारंटी दी जाए तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सार्वभौमिक बनाया जाए।
4. सभी के लिए मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी और स्वच्छता के अधिकार की गारंटी दी जाए। नई शिक्षा नीति, 2020 को खत्म किया जाए।
5. सभी के लिए आवास सुनिश्चित किया जाए।
6. वन अधिकार अधिनियम का सख्ती से क्रियान्वयन किया जाए ; वन (संरक्षण) अधिनियम, 2023 और जैव-विविधता अधिनियम और नियमों में संशोधन, जो केंद्र सरकार को निवासियों को सूचित किए बिना भी जंगल की कटाई की अनुमति देते हैं वापस लिए जाए। जोतने वाले को जमीन सुनिश्चित की जाए।
7. राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन को 26000 रुपये प्रति माह सुनिश्चित किया जाए।
8. भारतीय श्रम सम्मेलन नियमित रूप से आयोजित किया जाए।
9. सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, सरकारी विभागों का निजीकरण रोका जाए तथा राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) को खत्म किया जाए। खनिजों और धातुओं के खनन पर मौजूदा कानून में संशोधन किया जाए तथा स्थानीय समुदायों, खासकर आदिवासियों और किसानों के उत्थान के लिए कोयला खदानों सहित खदानों से होने वाले लाभ का 50% हिस्सा सुनिश्चित किया जाए।
10. बिजली (संशोधन) विधेयक, 2022 को वापस लिया जाए। कोई प्रीपेड स्मार्ट मीटर नहीं चलेगा।
11. काम करने के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया जाए। स्वीकृत पदों को भरें और बेरोजगारों के लिए रोजगार पैदा करें। मनरेगा का विस्तार किया जाए (प्रति वर्ष 200 दिन और 600 रुपये प्रतिदिन मजदूरी) और उसे कार्यान्वयन किया जाए। शहरी रोजगार गारंटी अधिनियम लागू करें।
12. बीज, उर्वरक और बिजली पर किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी बढ़ाएं। किसानों की उपज के लिए कानूनी तौर पर सी2+50% की दर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) की गारंटी दी जाए और फसलों के खरीद की गारंटी दी जाए। किसानों की आत्महत्या को हर कीमत पर रोकें।
13. कॉरपोरेट परस्त प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को वापस लिया जाए और सभी फसलों के लिए एक व्यापक सार्वजनिक क्षेत्र फसल बीमा योजना स्थापित की जाए, ताकि किसानों को जलवायु परिवर्तन, सूखा, बाढ़, फसल संबंधी बीमारियों आदि के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई की जा सके।
14. सभी किसान परिवारों को कर्ज के जाल से मुक्त करने के लिए व्यापक ऋण माफी योजना की घोषणा की जाए।
15. केंद्र सरकार द्वारा दिए गए लिखित आश्वासनों , जिसके आधार पर ऐतिहासिक किसान संघर्ष को स्थगित किया गया था, को लागू किया जाए। सभी शहीद किसानों के लिए सिंघु बॉर्डर पर स्मारक बनाया जाए, उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाए और उनका पुनर्वास किया जाए, सभी लंबित मामलों को वापस लिया जाए, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी पर मुकदमा चलाया जाए।
16. चार श्रम संहिताओं को रद्द किया जाए, निश्चित अवधि के रोजगार (फिक्स टर्म एम्प्लॉइमन्ट) को वापस लिया जाए और काम पर समानता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। श्रम के केज्यूअलकरण(अस्थायीकरण) को समाप्त किया जाए। असंगठित क्षेत्र के सभी श्रमिकों जैसे गृह-आधारित श्रमिकों, फेरीवाले, कूड़ा बीनने वाले, घरेलू कामगार, निर्माण श्रमिक, प्रवासी श्रमिक, योजना श्रमिक, कृषि श्रमिक, दुकान/प्रतिष्ठानों में कार्यरत श्रमिक, लोडिंग/अनलोडिंग श्रमिक(हम्माल-तुलावटी आदि), गिग श्रमिक, नमक उत्पादक श्रमिक, बीड़ी श्रमिक, ताड़ी निकालने वाले श्रमिक, रिक्शा-चालक, ऑटो/रिक्शा/टैक्सी चालक, विदेशों में प्रवासी श्रमिक, मछली पकड़ने वाले समुदाय आदि को पंजीकृत किया जाए और उन्हे पेंशन सहित व्यापक सामाजिक सुरक्षा में पोर्टेबिलिटी दी जाए।
17. कल्याण कोष से योगदान के साथ निर्माण कामगारों को ईएसआई कवरेज दिया जाए, ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत सभी कामगारों को स्वास्थ्य योजनाओं, मातृत्व लाभ, जीवन और विकलांगता बीमा का कवरेज भी दिया जाए।
18. घरेलू कामगारों और घर-आधारित कामगारों पर आईएलओ कन्वेन्शनों की पुष्टि करें और उचित कानून बनाएं। प्रवासी श्रमिकों पर व्यापक नीति बनाएं, मौजूदा अंतर-राज्य प्रवासी श्रमिक (रोजगार का विनियमन) अधिनियम, 1979 को मजबूत करें ताकि उनके सामाजिक सुरक्षा कवर की पोर्टेबिलिटी प्रदान की जा सके।
19. नई पेंशन योजना (एनपीएस) को खत्म किया जाए, पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल किया जाए और सभी को सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाए।
20. मध्यप्रदेश में न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण में किए गए घोटाले तथा उच्च न्यायालय के स्थगन के जरिए इसे छीने के मामले में श्रमिकों के साथ किए गए अन्याय को ठीक करो। 2019 से एरियर्स सहित वेतन पुनरीक्षण का भुगतान करो। न्यूनतम वेतन कानून के अनुसार अक्टूबर 2024 से देय नए न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण को शीघ्र करो।
21. सुपर रिच (अकूत अमीरों) पर टैक्स लगाया जाए; कॉर्पोरेट टैक्स बढ़ाया जाए; संपत्ति कर और उत्तराधिकार कर को फिर से लागू किया जाए।
22. संविधान के मूल मूल्यों – अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति का अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता, विविध संस्कृतियाँ, भाषाएँ, कानून के समक्ष समानता और देश के संघीय ढांचे आदि पर हमला बंद किया जाए।
अन्यथा देश के श्रमिक व किसान आगामी दिनों में तीव्र आंदोलन करेंगें
