
विनोद जैन
बालोद। शिक्षा के साथ-साथ समाज सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले एक दंपति ने अब देहदान करने का भी फैसला लिया है। इस संबंध में उन्होंने भारत रत्न स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेई स्मृति चिकित्सालय महाविद्यालय राजनांदगांव पहुंचकर शरीर रचना विभाग में मृत्यु उपरांत शरीर दान करने हेतु घोषणा पत्र (वसीयतनामा) भरकर जमा कर दिया है। बात कर रहे हैं बालोद की बेटी कुर्मी पारा के निवासी कादम्बिनी लोकेश पारकर यादव की। जिनका 6 नवंबर को जन्मदिन था। 40 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने जन्मदिन पर ही स्वयं और उनका साथ सदा निभाने वाले उनके पति भी देहदान करने का फैसला लिया और दोनों ने साथ मिलकर राजनांदगांव जाकर देहदान हेतु घोषणा पत्र भरा। उनके पति लोकेश कुमार पारकर जिला रायपुर के अभनपुर विकासखंड में गोबरा नवापारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में असिस्टेंट मेडिकल ऑफिसर के पद पर हैं। तो स्वयं कादम्बिनी यादव बालोद जिले में डौंडी लोहारा ब्लॉक के बड़गांव हायर सेकेंडरी स्कूल की व्याख्याता हैं।
तरौद के रहने वाले पूर्व विधायक स्व. लोकेंद्र यादव जी से मिली थी प्रेरणा
कादम्बिनी लोकेश पारकर यादव ने बताया स्व. लोकेंद्र यादव जी जो कि रिश्ते में बड़े भाई थे,और उनका सदा घर आना जाना रहता था, जब भी उनसे इस विषय मे सुनती थी तो मन मे हमेशा ख्याल आता ही था ,और सपने जैसा लगता था, उनका यह निर्णय शायद जिला में पहला था,8 अप्रैल 2013 को जब तरौद के रहने वाले पूर्व विधायक स्व. लोकेंद्र यादव जी का निधन हुआ तो उनके शव को भी रायपुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था। ये सब सामने ही हुआ, उनको अंतिम विदाई दी गई तो उसी समय से ही उनके मन में देहदान करने की इच्छा जगी हुई थी , विवाह के बाद पति जो स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं तो उनकी प्रेरणा और शक्ति से से और इस सपने को बल मिला और पुण्य कार्य करने का अवसर उन्होंने अपने जन्मदिन पर चुना। इसी तरह उनके पति डॉ लोकेश पारकर का कहना है कि वह स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हुए हैं तो देहदान के प्रति उनकी रुचि शुरुआत से थी। कादम्बिनी कहती है कि उनके पति स्वास्थ्य विभाग में है इसलिए उनका भी सपोर्ट प्राप्त हुआ और उन्होंने इस देहदान के लिए समर्थन दिया तो स्वयं भी अपनी पत्नी के साथ मिलकर देहदान के लिए घोषणा पत्र भरा। और वो अन्य को भी देहदान करने प्रेरित करते हैं,अपने जन्मदिन पर देहदान की घोषणा पत्र भरकर इस दंपति ने एक मिशाल पेश की जो दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत है। इस निर्णय पर कलेक्टर सर बालोद द्वारा सम्मना भी किया गया
साथ ही परिवार के सभी सदस्य, मित्र गण, शाला परिवार, रेडक्रॉस सोसाइटी शाखा बालोद, बालोद शिक्षा विभाग, गणमान्य जनों सहित भावना फाउंडेशन, अभिप्रेरणा ग्रुप, जिला हॉकी संघ और अन्य लोगों ने शुभकामनाएं प्रेषित की है। ज्ञात हो कि कादम्बिनी और उनके पति लोकेश दोनों ही स्वास्थ्य और समाज सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। अनजान व्यक्तियों का भी अगर फोन आता हैं तो उनकी सहायता में भी वे कभी पीछे नहीं हटते हैं। ब्लड दिलाने का प्रयास करते हैं। खुद कई बार दोनों ही ब्लड डोनेट कर चुके हैं, बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध रहे के साथ आर्थिक सहयोग भी समय पर वे करते रहते हैं। दोनों ब्लड डोनेशन और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में लंबे समय से कार्यरत हैं।
मृत्यु के उपरांत शरीर को जला दिया जाता है जो फिर किसी काम का नहीं आता। इसलिए दोनों ने देहदान करने का फैसला लिया ताकि मेडिकल की पढ़ाई करने वाली युवा पीढ़ी उनके मृत शरीर पर अध्ययन करके आने वाले समय में समाज सेवा कर सके और दूसरे भी उनके इस कदम से प्रेरित हो। उन्होंने अपील भी किया है कि हर व्यक्ति को देहदान करना चाहिए। उनके इस कदम पर इंडियन रेडकार्स सोसाइटी की पहल पर बालोद जिले के कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल जी ने भी उन्हें सम्मानित किया।
