मोदी केबिनेट ने महिला आरक्षण बिल पर मुहर लगा दी महिला आरक्षण विधेयक (Mahila arakshan) लंबे समय से संसद में लंबित है। मार्च 2010 में महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा से पारित हो चुकी है और अब यह लोकसभा में लंबित है। बताया जा रहा है कि इस विधेयक पर कोई भी दल एकमत नहीं दिख रहा है। मौजूदा लोकसभा में केवल 14 प्रतिशत महिला संसद हैं।

रिपुदमन सिंह बैस

बिग ब्रेकिंग

रायपुर | छत्तीसगढ़ में विधानसभा की कुल 90 सीटें हैं। इनमें 29 सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) और 10 सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है। बाकी सभी सीटें सामान्य हैं। यानी बाकी बची 51 सीटों से कोई भी चुनाव लड़ सकता है। आरक्षित या अनारक्षित लगभग अधिकांश सीटों पर पार्टियां पुरुष उम्मीदवारों को ही टिकट देती हैं। महिला उम्मीदवारों की संख्या बहुत ही कम होती है। राष्ट्रीय राजनीतिक दल भी बमुश्किल पांच से 10 ही महिलाओं को टिकट देती हैं, लेकिन जल्द ही इसमें बदलाव हो सकता है। इस बदलाव का असर राज्य की 90 में से 30 सीटों पर पड़ेगा। राज्य की 30 सीटें इन में कुछ आरक्षित सीटें भी आएंगी, ऐसी हो जाएगी कि उन पर केवल महिलाएं ही चुनाव लड़ पाएंगी।
दरअसल, मामला महिला आरक्षण से जुड़ा हुआ है। संसद के विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस महिला आरक्षण (Mahila arakshan) बिल की मांग जोरशोर से कर रही है। इस मांग को लेकर कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक सक्रिय हो गई है। सरकार अगर महिला आरक्षण बिल संसद पास हो जाता है तो विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में करीब 33 प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगे। इस हिसाब से छत्तीसगढ़ की 90 सीटों में से कम से कम 30 सीटों पर केवल महिलाएं ही चुनाव लड़ पाएंगी ।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पिछले नौ साल से मांग कर रही है कि महिला आरक्षण (Mahila arakshan) विधेयक, जो पहले ही राज्यसभा से पारित हो चुका है, उसे लोकसभा से भी पारित कराया जाना चाहिए। राज्यसभा में पेश / पारित किए गए विधेयक समाप्त (Lapse) नहीं होते हैं। इसलिए महिला आरक्षण विधेयक अभी भी जीवित (Active) है। महिलाओं को उनका हक देने केन्द्र सरकार लोकसभा के विशेष सत्र में विधेयक को प्रस्तुत करे। भाजपा का चरित्र महिला विरोधी है। अतः वह महिला विधेयक पारित कराएगी इसकी संभावना कम ही है। भाजपा हमेशा से ही महिलाओं के लिये दुर्भावना रखती है। भाजपा के पितृ संगठन आरएसएस में जो महिलाओं को पदाधिकारी नहीं बनाया जाता है।
बैज ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों के प्रयास से ही आज देशभर में पंचायतों और नगर पालिकाओं में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं। यह 40 प्रतिशत के आसपास है। भाजपा महिलाओं को उनका हक देने विरोधी रही है। आज लोकसभा में भाजपा की मोदी सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है। अतः भाजपा चाहे तो महिलाओं को उसका अधिकार अवश्य मिल जायेगा। कांग्रेस ने अपनी कार्यसमिति में भी महिला आरक्षण के लिये प्रस्ताव पारित किया है। वर्तमान केन्द्र सरकार महिला आरक्षण बिल नहीं पारित करेगी तो कांग्रेस की सरकार बनने के बाद महिलाओं को उनका अधिकार कांग्रेस देगी।
बताया जा रहा है केंद्र सरकार नगरीय निकायों में महिला आरक्षण का दायरा 33 से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की तैयारी में है। इसकी प्रक्रिया करीब दो वर्ष से भी अधिक समय से चल रही है। केंद्र सरकार ने इसको लेकर राज्यों से राज्य मांगी थी। छत्तीसगढ़ सरकार नगरीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रस्ताव पर सहमति दे चुकी है। बता दें कि राज्य में 14 नगर निगम, 43 नगर पालिका और 112 नगर पंचायत मिलाकर 169 निकायों में 3260 वार्ड हैं। निकायों में अभी महिलाओं के लिए 33% आरक्षण है। इस लिहाज से महिला पार्षदों की संख्या 1076 है। यह भी बताते चले कि राज्य में नगरीय निकायों में महिला आरक्षण की व्यवस्था 2007-08 में लागू की गई। तत्कालीन भाजपा सरकार महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया था।

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