नरसिंहपुर
आशीष दुबे
नरसिहपुर। व्यवसायिकता के दौर में डॉक्टरी पेशे में भले सेकेण्डों डाक्टरों हो लेकिन आज भी ऐसे डॉक्टर समाज में मौजूद हैं जिनकी दुहाई अक्सर मरीज दिया करते हैं। वह मंहगाई की मार झेलते हैं फिर भी कम कोई भी शुल्क लिए विना बेहतर उपचार करते हैं। इनके लिए सेवाभाव से बढ़कर दूसरा कोई धन नहीं है। अर्थयुग में फीस लेकर न लेकर डाक्टरी पेशे को कायम रखा है बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा के स्रोत भी हैं।
जीते हैं सामान्य डॉक्टर की जिंदगी:-
गरीब का बच्चा बीमार होता है तो परिजन बिना किसी से पूछे डॉ. डाक्टर आर आर कुर्रे के पास जाते हैं क्योंकि उसे पता होता है कि वहां पर फीस नहीं लेते हैं साथ ही सस्ती दवाएं और फ्री में दवाई भी मिल जाती और जो दबाई उपलब्ध नहीं पाती हो वह कम दाम की दबाई लिख देते हैं । डॉ.आर आर आर कुर्रे सरकारी सेवा में हमेशा 24 घंटे मरीजों की सेवा में तत्पर रहते हैं । शासकीय क्लीनिक और करीब 10 साल पहले से एक रुपए भी फीस नहीं लेते हैं और उपचार शुरू कर देते हैं ।साथ ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उनके सेवा भाव को देखते हुए मरीज उन्हें अपना डॉक्टर मानते हैं। डाक्टर आर आर कुर्रे डाक्टरी पेशे के साथ-साथ पर्यावरण का भी ध्यान रखते हैं और प्रत्येक सप्ताह है एक वृक्ष भी लगाते हैं डॉक्टरी पेशे का मान बनाए हुए हैं। निजी अस्पताल होने के बाद भी वह सामान्य डॉक्टर की जिंदगी जीते हैं। लग्जरी गाडिय़ों में चलने का शौक नहीं। सौ?य व्यवहार पहचान है। वह कहते है मरीजों की सेवा ही सबसे बड़ा धन है। उनका स्नेह ही सबसे बड़ी उपलब्धि है।
रेलवे के कर्मचारियों व अधिकारियों के प्रति रहते हैं समर्पित:-
रेलवे चिकित्सक डाक्टर आर आर कुर्रे नरसिहपुर रेल्वे चिकित्साक में पदस्थ हैं ।
वह रेलवे के कर्मचारियों-अधिकारियों व मरीजों के लिए भगवान से कम नहीं हैं। *_कौन से सन् में के ~मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस_* करने के बाद चाहते तो भोपाल, इंदौर के बड़े अस्पतालों में नौकरी करते लेकिन डाक्टर आर आर कुर्रे ने ने नरसिंहपुर व पिपरिया का जीवन अपनाया। वह बताते हैं कि एमबीबीएस करने के बाद से ही नरसिहपुर और पिपारिया में शासकीय चिकित्सालय में उपचार करना शुरू किया। कहते हैं कि शासकीय चिकित्सक होने के बाद भी वह कोई शुल्क नहीं लेते हैं साथ ही मरीज की दवा और उपचार फ्री में हो जाता है। वह कहते हैं कि में डॉक्टरों को मरीजों को परिवार की तरह देख रेख की जरूरत है। नरसिहपुर क्षेत्र में बड़ी आबादी आज भी चिकित्सा के अभाव में जीने को मजबूर है। साथ ही रेलवे चिकित्सक डाक्टर आर आर कुर्रे प्रतिदिन जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करते हे जिससे लोग जागरूक होकर नशा व साधारण जिंदगी जी सके ।
नई पीढ़ी के चिकित्सकों को यह सोचने और अमल करने की जरूरत है।
इसलिए मनाते हैं नेशनल डॉक्टर्स डे:-
हर साल एक जुलाई को डॉ. बिधान चंद्र राय की याद में नेशनल डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। डॉक्टर राय का जन्म एक जुलाई 1882 में बिहार में हुआ था। चिकित्सा के क्षेत्र में उन्होंने उल्लेखनीय काम किया, वर्ष 1961 में भारत रत्न से नवाजा गया। वे 14 जनवरी 1948 को पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री बने और अपनी मौत के दिन तक लगातार चौदह वर्ष तक इस पद पर रहे। उनका निधन भी एक जुलाई को ही हुआ। वर्ष 1962 में वे यह दुनिया छोड़कर चले गए। इसके बाद हर एक जुलाई को डॉक्टर्स डे मनाया जाता है।
