दीपक विश्वकर्मा
उमरिया जिला के बिरसिंहपुर पाली साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के जोहिला क्षेत्र में कंपनी की करोड़ों रुपये मूल्य की आवासीय संपत्तियों पर अवैध कब्जे और कथित रूप से उनकी खरीद-फरोख्त का मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कंपनी की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की निगरानी के बावजूद हजारों क्वार्टरों पर अवैध कब्जा कैसे हो गया? स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, बिरसिंहपुर पाली स्थित SECL के खाली पड़े क्वार्टरों में वर्षों से बाहरी व्यक्तियों को बसाया जा रहा है। आरोप है कि जिन सुरक्षा कर्मियों को कंपनी की संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हीं की कथित मिलीभगत से बंद और सील क्वार्टरों के ताले तोड़कर उन्हें कब्जाधारियों को सौंपा जा रहा है। इसके बदले मोटी रकम वसूले जाने की चर्चाएं भी क्षेत्र में आम हैं।
90 प्रतिशत से अधिक क्वार्टरों पर अवैध कब्जे का दावा…
जानकारी के अनुसार, बिरसिंहपुर पाली में SECL के हजारों आवासीय क्वार्टर निर्मित हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में क्वार्टर या तो अवैध कब्जे में हैं या फिर ऐसे लोगों के पास हैं जिनका कंपनी से कोई वैधानिक संबंध नहीं है। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि लगभग 90 प्रतिशत से अधिक क्वार्टरों पर अवैध रूप से कब्जा किया जा चुका है और यह सिलसिला अब भी जारी है यदि यह दावा सही है तो यह केवल सुरक्षा विभाग की विफलता नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
संपदा विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल..
सब एरिया के संपदा विभाग को इस स्थिति की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर कार्रवाई न होने के पीछे कारण क्या है? क्या जिम्मेदार अधिकारी स्थिति से अनभिज्ञ हैं या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं?
कंपनी की संपत्ति पर अवैध कब्जे का यह मामला केवल राजस्व और संपत्ति के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे भविष्य में सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और आपराधिक गतिविधियों के बढ़ने की आशंका भी बढ़ रही है।
करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा, जवाबदेह कौन?
विशेषज्ञों का मानना है कि SECL जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी की संपत्तियां देश की संपत्ति हैं ऐसे में यदि कंपनी के क्वार्टरों की खुलेआम खरीद-फरोख्त हो रही है और प्रबंधन मूकदर्शक बना हुआ है, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर संस्थागत विफलता का मामला माना जाएगा।
खाली क्वार्टरों की नियमित निगरानी क्यों नहीं की गई? अवैध कब्जाधारियों की सूची तैयार क्यों नहीं हुई?
सुरक्षा विभाग और संपदा विभाग की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई?
वर्षों से चल रहे इस कथित खेल पर प्रबंधन ने कार्रवाई क्यों नहीं की?
स्थानीय नागरिकों ने SECL के क्षेत्रीय महाप्रबंधक, मुख्यालय प्रबंधन, कोल इंडिया लिमिटेड तथा जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा कर्मियों, संपदा विभाग अथवा अन्य अधिकारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया जाना चाहिए।
जब SECL अपनी ही संपत्ति की सुरक्षा नहीं कर पा रही है, तो फिर करोड़ों रुपये की परिसंपत्तियों की रक्षा का दावा कितना विश्वसनीय है? जोहिला क्षेत्र में अवैध कब्जों का यह मामला अब केवल क्वार्टरों का नहीं, बल्कि पूरे प्रबंधन की कार्यप्रणाली और जवाबदेही की परीक्षा बन चुका है।

