चंद्रहास वैष्णव
डाक विभाग में कथित निजीकरण, कर्मचारियों पर बढ़ते मानसिक दबाव और लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली के विरोध में भारतीय डाक कर्मचारी महासंघ ने राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। महासंघ ने जुलाई से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की घोषणा करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो 18 अगस्त से देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
महासंघ के छत्तीसगढ़ परिमंडल सचिव हेमंत कुमार पांडे ने बताया कि डाक विभाग में कर्मचारियों और ग्रामीण डाक सेवकों (जीडीएस) पर लगातार टारगेट पूरा करने का दबाव बनाया जा रहा है। यूनियन का आरोप है कि कर्मचारियों को उनकी मूल जिम्मेदारियों से हटाकर विभिन्न योजनाओं के लक्ष्य पूरे करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। कई मामलों में कर्मचारियों को अपने वेतन से राशि खर्च कर खाते खुलवाने तक के लिए दबाव झेलना पड़ रहा है, जिससे उनमें मानसिक तनाव बढ़ रहा है।
महासंघ का आरोप है कि विदेशी परामर्शदाता कंपनी ‘मैकिन्जी’ के सुझावों के आधार पर डाक विभाग में ऐसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं, जो विभाग के निजीकरण को बढ़ावा देती हैं। संगठन का कहना है कि डाक विभाग जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवा को कमजोर करने की बजाय उसे मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
आंदोलन की रूपरेखा के अनुसार 20 से 27 जुलाई तक कर्मचारी कार्यालयों में काली पट्टी बांधकर कार्य करेंगे। 28 जुलाई को मंडलीय कार्यालयों के समक्ष लंच अवकाश के दौरान प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 5 अगस्त को देशव्यापी एक दिवसीय हड़ताल आयोजित की जाएगी। यदि इसके बाद भी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी।
महासंघ ने सरकार के समक्ष नौ प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें कर्मचारियों पर टारगेट आधारित दबाव समाप्त करना, रेल डाक सेवा (आरएमएस) को पुनः शुरू करना, मेल मोटर सेवा सहित अन्य रिक्त पदों पर भर्ती करना, विभाग में बढ़ते भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना तथा पोस्टल अकाउंट्स के विकेंद्रीकरण पर रोक लगाना शामिल है। इसके अलावा पूर्व सैनिक कोटे से भर्ती कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर करने, मृतक आश्रितों को रोजगार देने, पुराने डिलीवरी सिस्टम को बहाल करने तथा 17 सितंबर को राष्ट्रीय श्रम दिवस घोषित करने की मांग भी उठाई गई है।
महासंघ ने कहा है कि यह संघर्ष केवल कर्मचारियों के हितों तक सीमित नहीं है, बल्कि डाक विभाग के अस्तित्व और सार्वजनिक सेवाओं की रक्षा का भी आंदोलन है। संगठन ने देशभर के कर्मचारियों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया है।
