@दीपक विश्वकर्मा
प्रदेश के मुख्यमंत्री हर मंच से यह बात कहते नजर आते हैं कि प्रदेश में किसी भी तरह के माफिया को सक्रीय नही होने दिया जायेगा, ठीक इसके विपरीत उमरिया में भूमाफिया का तांडव आये दिन सामने आ रहा है, हाल ही में भूमाफिया ने उजनिया स्थित उमरार नदी के तट को ही अपना निशाना बनाया और जो भूमि सन् 90 में और उसके पहले सरकारी थी फिर गैरहकदार के रुप में किसी सोनी के नाम दर्ज हुई लेकिन कुछ ही दिन बाद यही खसरा नंबर 41 निजी भूमि हो जाती है जिसे बेच दिया जाता है, और उस पर प्लाटिंग करने की कार्यवाही शुरू कर दी जाती है, जबकि नदी के किनारे को ही पाट दिया गया है, कुल मिलाकर नदी को चीरते हुए नये आशियाने बनाने की यह इस तैयारी में सरकारी तंत्र की अहम भूमिका मानी जा रही है॥ हालांकि उन्हीं ने काम बनाया और अब वही स्टे दे रहे हैं, फिलहाल संबंधित प्लाटिंग वाली भूमि पर स्टे ले लिया गया है॥
*जिम्मेदार भी शामिल, गांधी जी के हुए दर्शन*
बताया जाता है कि मुख्यालय स्थित उजनिया में हो रही अवैध प्लाटिंग और गैरहकदार की भूमि कैसे और किस आदेश के तहत संबंधित विक्रेता के नाम आ जाती है जिसे वह करोड़ो में बेच रहा है, जबकि वह उमरार नदी का किनारा है जिसे मिट्टी डालकर पाटा जा रहा है॥ इस खेल में भूमि के कागजात से लेकर नाप तौल और आदेशों की आहूति देने में सरकारी तंत्र ने भी अहम भूमिका निभाई है, जिसके एवज में तंत्र को गांधी जी दर्शन हुए हैं और आगे भी कराते रहने का वादा किया गया है॥
*सीएम के निर्देश पर तंत्र की लीपापोती*
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान ने मंच बे घोषणा करते हुए कहा है कि प्रदेश भर में बनी वर्ष 2016 तक की अवैध कालोनियों को वैध कर दिया जायेगा वहीं जिलों के अधिकारियों को यह निर्देश दिये है कि नई कालोनी किसी भी कीमत पर नही बननी चाहिए और न ही खेतीहर भूमि पर प्लाटिंग हो, मगर सीएम के निर्देश को फुटबॉल बनाकर खेलते हुए सरकारी तंत्र ने ऐसा गेम सेट कर दिया कि अब कालोनी बनकर ही रहेगी॥ बहरहाल अब देखना होगा कि पूर्व कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव के जाने के बाद से भूमाफिया ने राहत की सांस ली थी, लेकिन अवैध प्लाटिंग की यह कहानी ने एक बार फिर माफिया पर सवाल खड़े कर दिया है, अब देखना होगा कि जिले के मुखिया कौन सा एक्शन लेते हैं॥
