*छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा धर्म स्वतंत्र विधेयक 2026 के साथ डीलिस्टिंग भी अत्यंत आवश्यक – यतींद्र छोटू सलाम* सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

कोंडागांव ,यजुवेन्द्र सिंह ठाकुर

सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च 2026 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि कोई अनुसूचित जाति (SC) का व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर ईसाई या मुस्लिम धर्म अपनाता है, तो उसका SC दर्जा (आरक्षण और विशेषाधिकार) तुरंत खत्म हो जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि SC का संवैधानिक प्रावधान केवल इन तीन धर्मों तक सीमित है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु:
जाति प्रमाण पत्र निरस्त: धर्म परिवर्तन करने पर संबंधित व्यक्ति का जातिगत दर्जा खत्म हो जाएगा।
आरक्षण का लाभ नहीं: धर्म बदलने के बाद, वह व्यक्ति अब अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सरकारी नौकरियों या अन्य सुविधाओं का पात्र नहीं रहेगा।
संवैधानिक प्रावधान: कोर्ट ने दोहराया कि अनुसूचित जाति के विशेषाधिकार उन धर्मों तक ही सीमित हैं जहां जाति व्यवस्था का आधार है, न कि उन धर्मों में जो इसे नहीं मानते।

पहले तो मैं पूरे आदिवासी समाज की ओर से सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय व छत्तीसगढ़ सरकार के धर्म स्वतंत्र विधेयक 2026 पारित करने के निर्णय के लिए धन्यवाद करता हूं
कभी शिक्षा के नाम पर कभी स्वास्थ्य के नाम पर तो कभी धोखाधड़ी के नाम पर जो धर्मांतरण का गंदा खेल भोले भाले लोगों के जीवन वा ग्रामीण परम्परा को लगातार प्रभावित कर लोगों को उनके परंपरा संस्कृति रीति रिवाज से दूर करने का यह षड्यंत्र क्षेत्र समाज के लिए गंभीर विषय है जिसमें तबाही के सिवा आगे और कुछ भी नहीं है ऐसे लोगों के ऊपर रोक लगाने के लिए जो छत्तीसगढ़ सरकार ने मार्च 2026 में विधानसभा में बेहद सख्त छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्र विधायक 2026 पारित किया है यह ऐतिहासिक निर्णय है

आज ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा डर का माहौल है कि जब गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो भी जिला प्रशासन परेशान रहता हैं कि
लाश दफनाने को लेकर कोई दंगा ना हो जाए या जिले का लायन आर्डर ना बिगड़ जाए ऐसा क्यों हो रहा है इसमें सभी को विचार करने की आवश्यकता है

आज धर्मांतरण कानून में जो सजा का प्रावधान सरकार ने ऐसी गतिविधि को रोक लगाने के लिए किया है

जिसमें जबरन धर्मांतरण पर पूर्ण रोक लगाना चाहिए
*इसमें अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 साल की सजा ₹5 लाख जुर्माना है
.* विशेष मामलों में सख्ती यदि पीड़ित नाबालिक या महिला या एसटी एससी और ओबीसी से है तो सजा 10 से 20 साल तक हो सकती है और जुर्माना 10 लाख तक होगा
*. सामूहिक धर्मांतरण
यदि दो या दो से अधिक लोगों का धर्मांतरण कराया जाता है तो 10 साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा और 25 लाख तक का जुर्माना लगेगा

.* पूर्वानुमति धर्म बदलने से 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना करना अनिवार्य है अन्यथा इससे अवैध माना जाएगा और धर्म बदलने के बाद आपको st sc से मिलने वाली सारी योजनाएं पूर्ण रूप से समाप्त कर दी जाएगी
.* मददगारों पर कार्यवाही
अवैध धर्मांतरण में सहयोग करने वालों को भी सजा और जुर्माना हो सकता है
.* शादी के लिए धर्मांतरण
केवल विवाह के उद्देश्य से किया गया धर्मांतरण को अमान्य शून्य घोषित किया जाएगा

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण के खिलाफ कानून (छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026) के साथ-साथ जनजातीय समाज के एक बड़े वर्ग द्वारा डीलिस्टिंग (Delisting) कानून को भी उतना ही ज़रूरी माना जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी संकेत दिया है कि धर्म बदलने वाले आदिवासियों को एसटी (ST) का दर्जा और लाभ नहीं मिलना चाहिए, जिसे डीलिस्टिंग कहा जाता है।

कानून और डीलिस्टिंग की आवश्यकता से जुड़े मुख्य बिंदु:
धर्मांतरण कानून (2026): यह नया कानून जबरन, धोखे, प्रलोभन या सामूहिक धर्मांतरण को रोकता है, जिसमें 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
डीलिस्टिंग की मांग: छत्तीसगढ़ के बस्तर और जशपुर सहित कई क्षेत्रों के आदिवासी समूह लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि जो आदिवासी अपना मूल धर्म छोड़कर ईसाई या अन्य धर्म अपना लेते हैं, उन्हें अनुसूचित जनजाति (ST) की सूची से हटा दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे अब अपनी पारंपरिक संस्कृति, रीति-रिवाजों और पूजा पद्धति से दूर हो चुके हैं।
संवैधानिक प्रावधान: बहस का मुख्य बिंदु यह है कि अनुसूचित जाति (SC) के मामले में धर्म बदलने पर आरक्षण का लाभ स्वतः खत्म हो जाता है, लेकिन एसटी (ST) के मामले में ऐसा नहीं है। का तर्क है कि इस असमानता को दूर करने के लिए डीलिस्टिंग आवश्यक है।

संवैधानिक संशोधन: इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन की मांग की जा रही है, जो अनुसूचित जनजातियों से संबंधित है, ताकि धर्मान्तरित लोगों को आरक्षण का लाभ न मिले
और धर्म विधेयक कानून के साथ डीलिस्टिंग कानून ही समाज को और भी ज्यादा सुरक्षा प्रदान करेगा
मेरा छत्तीसगढ़ सरकार व केंद्र सरकार से आग्रह है कि इसमें त्वरित विचार करते हुए डीलिस्टिंग प्रक्रिया को भी पूर्ण रूप से पारित किया जाए

Express MPCG