नरसिंहपुर:
आशीष कुमार दुबे

जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली और भ्रष्टाचार के खिलाफ नरसिंहपुर के जागरूक नागरिकों का जो संघर्ष पिछले 9 दिनों से थाना कोतवाली के सामने जारी था, वह आज एक भावुक क्षण और प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। कड़ाके की धूप और विपरीत परिस्थितियों के बीच चल रहे इस अनिश्चितकालीन धरने और दो दिनों से जारी भूख हड़ताल ने आखिरकार प्रशासन को झुकने पर मजबूर कर दिया।
भावुक क्षण: नन्ही बच्ची ने तुड़वाया अनशन
आंदोलन के 9वें दिन धरना स्थल पर एक बेहद विशेष और भावुक दृश्य देखने को मिला। सामाजिक कार्यकर्ता अभय वानगात्री और अन्य प्रदर्शनकारी, जो अपनी मांगों को लेकर अड़े थे, उनका अनशन एक नन्ही बच्ची ने अपने हाथों से जूस पिलाकर तुड़वाया।
इस मौके पर नरसिंहपुर एसडीएम और नगर पालिका की मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) नीलम चौहान स्वयं धरना स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने आंदोलनकारियों की सुध ली और उन्हें जूस पिलाकर पारणा करवाया।
साक्ष्यों के बाद भी कार्रवाई में देरी पर था आक्रोश
धरना दे रहे प्रबुद्ध नागरिकों और शिकायतकर्ताओं का मुख्य आक्रोश इस बात को लेकर था कि उन्होंने मनरेगा, ग्राम पंचायतों में वित्तीय धांधली, अवैध होटल, मॉल, पार्किंग व्यवस्था में अनियमितता और अतिक्रमण जैसे गंभीर मुद्दों पर साक्ष्य सहित शिकायतें दी थीं। इसके बावजूद:
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के बजाय फाइलों को दबाया जा रहा था।
जनहित के आवेदन विभिन्न विभागों में धूल खा रहे थे।
जिम्मेदार अधिकारी लगातार मौन साधे हुए थे।
बड़ी कामयाबी: 59 अवैध दुकानों को नोटिस, एक माह का अल्टीमेटम
आंदोलन के दबाव में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिया है। प्रशासन ने शहर में 59 दुकानों को चिन्हित कर नोटिस जारी करने की बात कही है। इन सभी को एक माह का अल्टीमेटम दिया गया है, जिसके बाद नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को लिखित आश्वासन दिया कि उनकी अन्य मांगों पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एक महीने की ‘डेडलाइन’ और अभय वानगात्री की चेतावनी
शिकायतकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि इसे प्रशासन के आश्वासन पर एक माह के लिए स्थगित किया गया है। उन्होंने प्रशासन को अपनी मांगों के निराकरण के लिए 30 दिन का समय दिया है।
सामाजिक कार्यकर्ता अभय वानगात्री ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है:
”हम प्रशासन को एक महीने का समय दे रहे हैं। यदि इस दौरान उचित कार्रवाई नहीं की गई और प्रशासन अपने वादों पर खरा नहीं उतरा, तो हम फिर से धरने पर बैठने के लिए मजबूर होंगे। तब आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा और इसकी गूँज मध्य प्रदेश सरकार से लेकर भारत सरकार (दिल्ली) तक सुनाई देगी।”
नरसिंहपुर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन की यह पहल शहर के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, लेकिन अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन एक महीने की समय सीमा में अपने वादों को कितना पूरा करता है।
