रिपुदमन सिंह बैस 
भानुप्रतापपुर। कलेक्टर एवं अध्यक्ष जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण के निर्देशानुसार एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ,जिला शिक्षा अधिकारी कांकेर,अनुविभागीय अधिकारी (रा),जिला परियोजना अधिकारी कांकेर के मार्गदर्शन में आज भानुप्रतापपुर विकासखण्ड में महापरीक्षा सम्पन्न हुई। आज प्रातः से ही इस परीक्षा केंद्रों में भीड बनी रही। असाक्षरों में खासा उत्साह नजर आया। भानुप्रतापपुर के ग्राम कराठी में नवसाक्षरों का निरीक्षण टीम सुरेंद्र उर्वशा तहसीलदार, टिकेश ठाकुर, अशोक ठाकुर एवं प्रअ श्रीमती फूलबाई सिन्हा के द्वारा गुलदस्ता और तिलक लगाकर स्वागत किया गया। ग्राम कराठी के श्रीमती रामशिला पददा एवं उनकी बहू श्रीमती सूरजबाई पददा ने एक साथ उपस्थित होकर परीक्षा दी। इसी तरह ग्राम कोकडे में पति पत्नि और मां बेटी एक साथ परीक्षा दिलाने पंहुचे। ग्राम जंजालीपारा कोरर में भी देवरानी जेठानी और पति पत्नि एक साथ परीक्षा में सम्मिलत हुए। केंद्र प्रवर्तित महत्वाकांक्षी योजना उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम में विकासखण्ड के 17 ग्राम पंचायतों का चिन्हांकन किया गया है। इसमें विनायकपुर,कराठी,आसुलखार,पेवारी,फरसकोट,भीरागांव,घोठिया,सोनेकन्हार, जातावाड़ा,बैजनपुरी,डुुमरकोट, सेलेगांव,हरनपुरी,भैंसाकन्हार डू,कनेचूर,चिल्हाटी और कोरर ग्राम पंचायत में परीक्षा सम्पन्न हुई। आज की परीक्षा में इन 17 ग्राम पंचायतों में 1450 असाक्षर सम्मिलित हुए। इन परीक्षा केंद्रों में केंद्राध्यक्ष एवं पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की गयी है। भानुप्रतापपुर विकासखण्ड में कुल 55 परीक्षा केंद्र बनााये गये थे। आज कीपरीक्षा मे तीन भाग होगें पढ़ना लिखना और गणित ज्ञान। परीक्षा केंद्र में परीक्षार्थियों को पेंसिल रबर आदि उपलब्ध कराया जावेगा। परीक्षा दिवस को अधिकारियों द्वारा मानिटरिेंग भी की जावेगी। आज के मानिटरिंग टीम में जिला परियोजना अधिकारी सुश्री पुष्पांजली ठाकुर ,खण्ड शिक्षा अधिकारी सुश्री क्षमा सोनेल, तहसीलदार भानुप्रतापपुर सुरेंद्र उर्वशा, रिसोर्स पर्सन टिकेश्वर सिंह ठाकुर, सहायक खण्ड शिक्षा अधिकारी मुकेश सोनवानी , बीआरसी राधेलाल नुरेटी, साक्षरता प्रभारी और नोडल अशोक ठाकुर ,श्रीमती राजेश्वरी गौतम,नंद कुमार अठभैया,शामिल थे। इसके आलावा भानुप्रतापपुर विकासखण्ड के सभी परीक्षा केंद्रों के केंद्राध्यक्ष, पर्यवेक्षक, सभी संकुल समन्वयक एवं संस्था के समस्त शिक्षक शिक्षिकाओं का योगदान रहा ।
