कांकेर,यजुवेंद्र सिंह ठाकुर

कांकेर। औषधीय खोज यात्रा कांकेर राष्ट्रीय उच्च शिक्षा अभियान उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ एवं क्षेत्रीय अपर संचालक बस्तर संभाग प्रो अनिल कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में तथा प्राचार्य डॉ चेतन राम पटेल एवं छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के अध्यक्ष कार्यक्रम के नोडल अधिकारी विश्वास मेश्राम के नेतृत्व में शासकीय भानुप्रतापदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं जिले के अन्य महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं के लिए विज्ञान लोकव्यापी कार्यक्रम के अंतर्गत औषधि पौधों की खोज यात्रा 2026 रखी गई।
कार्यक्रम के प्रथम चरण में 193 छात्र-छात्राओं का पंजीयन डॉ अर्चना सिंह, डॉ बसंत नाग, डॉ लक्ष्मी लेकाम, सुरेंद्र सिन्हा एवं रिखी भुआर्य के माध्यम से किया गया। पश्चात छात्र-छात्राओं को पांच समूह में लालाराम सिन्हा, दिनेश कुमार, आर बी एस बघेल, डॉ मिथिलेश सिन्हा, डॉ एच एन टंडन, डॉ राजेश शुक्ला, डॉ योगिता साहू, डॉ रामचंद्र साहू, पल्लवी गढ़पाले, पोषण साहू, डॉ नम्रता बाजपेई देवेंद्र कुमार, रुकमणी यादव, डिंपल गंजीर के नेतृत्व में विभाजित किया गया।
इस अवसर पर नोडल अधिकारी विश्वास मेश्राम ने यात्रा से पूर्व सभी प्रतिभागियों को यात्रा के दौरान रखी जाने वाली सावधानी एवं पेड़ पौधों को बिना नुकसान पहुंचाये खोज को किस स्वरूप में पूर्ण किया जाना है इसकी जानकारी दी गई। औषधि पौधों की खोज यात्रा ग्राम मर्रापी के मैदानी एवं पर्वतीय क्षेत्र में डॉ एम एल नायक के नेतृत्व में प्रारंभ किया गया।
यात्रा में दवई फूल, भिरहा, भालूमुसर, गोंदला, महुआगुड़ी, मांकड़ तेन्दु, भूई नीम, शतावर जैसे विभिन्न औषधि पौधों की खोज की गई एवं उनके वैज्ञानिक तथा स्थानीय नाम एवं उनके पारंपरिक उपयोग की जानकारी वैद्यराज सोनसाय सेवता, मनोज पटेल, वीर सिंह पददा गजानंद सिन्हा, श्रवण जैन, घनश्याम मन्डावी के द्वारा दिया गया। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र महाविद्यालय के जन भागीदारी समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह भाऊ की अध्यक्षता में एवं डॉ एम एल नायक के मुख्य आतिथ्य में जन भागीदारी के सदस्य सपन श्रीवास्तव, शशांक राय, सुनील जायसवाल, रोशन साहू के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न किया गया।
इस अवसर पर नोडल अधिकारी विश्वास मेश्राम ने कार्यक्रम की भूमिका एवं उपादेयता पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आज विज्ञान मानव जीवन के लिए क्यों आवश्यक है एवं पेड़ पौधों के बिना पर्यावरण चक्र, जीवन चक्र, कैसे प्रभावित हो सकता है एवं इनके संरक्षण के प्रति हमारी क्या जिम्मेदारी है, इसे रेखांकित किया।
विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर एम एल नायक ने कहा कि प्राचीन ज्ञान को आज संरक्षित करने की आवश्यकता है साथ ही जो हमारी प्राचीन धरोहर पेड़ पौधों के रूप में स्थापित हैं उन्हें पेटेंट कराने की आवश्यकता है। एक वैद्य एक लाइब्रेरी के समान होता है यदि वह अपने ज्ञान को भावी पीढ़ी को हस्तांतरित नहीं करता है तो एक लाइब्रेरी नष्ट हो जाने के समान है, इसलिए जो हमारे वैद्य हैं, औषधि पौधों के स्थानीय जानकार हैं उन्हें अपने ज्ञान को बताते रहना चाहिए।
अध्यक्षता कर रहे देवेंद्र सिंह भाऊ ने कहा कि यह हमारे लिए गौरव की बात है कि कांगेर वैली में हाईकस नाईकी नामक विशेष पीपल के खोजकर्ता प्रोफेसर नायक सर आज हमारे बीच उपस्थित हैं जो कई ज्ञानवर्धक पुस्तकों के लेखक हैं आज उम्र के इस पड़ाव में उनकी जिज्ञासा हम सबके लिए प्रेरणास्पद हैं। उच्च शिक्षा छत्तीसगढ़ शासन द्वारा औषधि पौधों की खोज यात्रा कार्यक्रम इस महाविद्यालय के द्वारा किया जाना हम सबके लिए सम्मान की बात है जो छात्र-छात्राएं इसमें भागीदारी किए हैं और आज जो ज्ञान अर्जित किया है उसे सहेजे एवं फैलाएं ताकि इस कार्यक्रम की उपयोगिता सदैव सबके लिए बनी रहे।
कार्यक्रम में दिनेश कुमार, अंजु मेश्राम, विज्ञान सभा के उपाध्यक्ष अनुपम जोफर पीएन राव, सुनील साहू का सहयोग रहा कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों एवं स्त्रोत व्यक्तियों को अतिथियों के द्वारा प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया तथा यात्रा के दौरान खोजे गए औषधि पौधों का प्रदर्शन किया गया। संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन प्रो अलका केरकेट्टा ने किया। रूसा के नोडल सुधीर सोवानी, टेक्निकल टीम में डॉ आशीष नेताम, मनीषा नाग, प्रो एल आर सिन्हा प्रो सुमीता पांडे डॉ नेल्सन खेस प्रो प्रियंका टोप्पो, डॉ अशोक कुमार ज्योति, प्रो रिचा सगने एवं महाविद्यालय के प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक एवं अतिथि प्राध्यापकों छात्र छात्राओं सहित महाविद्यालय परिवार का सहयोग रहा।

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