भरत भारद्वाज
कोंडागांव – जिले के फरसगांव विकासखंड अंतर्गत ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (आरईओ) *लकेश कुमार सेठिया* का आचरण अब केवल लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शासन-प्रशासन, मीडिया और संपूर्ण शासकीय तंत्र के लिए खुली चुनौती बनता जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि विभागीय कार्रवाई के बाद भी संबंधित अधिकारी में सुधार के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।
कुछ समय पूर्व मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर कृषि विभाग ने आरईओ की लगातार साप्ताहिक बैठकों से अनुपस्थिति, किसानों से दूरी, कार्यक्षेत्र से गायब रहने और सोशल मीडिया में अत्यधिक सक्रियता को गंभीर मानते हुए दो माह का वेतन रोकने की कार्रवाई की थी। इसके बावजूद अब संबंधित आरईओ खुले सार्वजनिक मंच और सोशल मीडिया पर प्रशासन व मीडिया पर टिप्पणी करते हुए अपनी कथित लोकप्रियता का प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं।
*शासकीय सेवा आचरण नियमों की खुली अवहेलना*
किसी भी शासकीय कर्मचारी—चाहे वह शिक्षक हो या कृषि विस्तार अधिकारी—से यह अपेक्षा की जाती है कि विभागीय कार्रवाई के बाद वह आत्ममंथन कर अपने आचरण और कार्यशैली में सुधार लाए। लेकिन यहां स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। कार्रवाई के बाद भी सोशल मीडिया पर रील, वीडियो और सार्वजनिक बयानबाजी यह दर्शाती है कि संबंधित अधिकारी को न तो विभागीय आदेशों का भय है और न ही प्रशासनिक अनुशासन की परवाह।
*शिक्षक-कर्मचारियों में जा रहा गलत संदेश*
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आरईओ लकेश सेठिया का यह आचरण अन्य शिक्षक-कर्मचारियों और मैदानी अमले के लिए गलत उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यदि कोई अधिकारी विभागीय कार्रवाई के बाद भी खुलेआम उदंडता दिखा सकता है, तो इससे विभागीय अनुशासन और शासन की साख पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
किसानों की अनदेखी, योजनाओं की प्रगति प्रभावित
आज भी फरसगांव क्षेत्र के किसान आरईओ की अनुपलब्धता से परेशान हैं। कृषि विभाग की योजनाओं की प्रगति अत्यंत कमजोर बताई जा रही है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी का कार्यस्थल से दूर रहना और बिना अनुमति अन्य ब्लॉकों में पाया जाना गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है।
*दुष्यंत नाग भी जांच के दायरे में, सोशल मीडिया पर समान भूमिका*
इस पूरे प्रकरण में यह तथ्य भी सामने आया है कि *आरईओ दुष्यंत नाग* भी शासकीय कार्य में लापरवाही को लेकर पहले से ही विभागीय जांच के दायरे में आ चुके हैं। इसके बावजूद अब सोशल मीडिया पर रील्स बनाने और शासकीय कार्यवाही का मजाक उड़ाने में लकेश सेठिया के साथ दुष्यंत नाग की भी बराबर की हिस्सेदारी देखी जा रही है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि मामला किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं, बल्कि यह शासकीय अनुशासन को सामूहिक रूप से चुनौती देने जैसा है।
*सीधी मांग—निलंबन व गहन विभागीय जांच*
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि—
👉 लापरवाह आरईओ लकेश सेठिया को तत्काल निलंबित किया जाए
👉 आरईओ दुष्यंत नाग पर भी समान रूप से कड़ी कार्रवाई हो
👉 पूरे प्रकरण की निष्पक्ष विभागीय जांच कराई जाए
👉 सोशल मीडिया पर शासकीय गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोपों पर पृथक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
अब यह देखना अहम होगा कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग सख्त कार्रवाई कर अनुशासन का स्पष्ट संदेश देते हैं, या फिर यह मामला भी पूर्व की तरह केवल औपचारिक कार्रवाई तक ही सीमित रह जाएगा।
