पहली बार हो रहे प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के चुनाव के ठीक दो दिन पहले स्वयंभू अध्यक्ष अजय प्रताप सिंह परिहार को सीएमएचओ ने किया निलंबित

जगदलपुर
चंद्रहास वैष्णव

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ गठन के बाद पहली बार छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का चुनाव होने जा रहा है। इसमें बस्तर जिले के अध्यक्ष को संघ के सदस्य चुनेंगे। इसी बीच विवादित आरएचओ अजय प्रताप सिंह परिहार ने भी संघ के जिलाध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करते हुए नामांकन भरा है, लेकिन अब उसके पुराने विवादित मामलों के चलते कलेक्टर हरीश एस. के आदेश के बाद सीएमएचओ डॉ. संजय बसाक ने उसे निलंबित कर दिया है। इधर संघ के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए दो दावेदारों ने नामांकन भरा था, जिसमें एक अजय प्रताप सिंह परिहार तो दूसरी रीमा दानी हैं। अजय प्रताप सिंह परिहार को निलंबित करने पर प्रतिद्वंद्वी रीमा दानी ने चुनाव अधिकारी के पास उसकी उम्मीदवारी रद्द करने की मांग करते पत्र भी लिखा है, लेकिन अब तक चुनाव अधिकारी ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

दरअसल छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का गठन छत्तीसगढ़ राज्य बनने के साथ ही हुआ था और संघ का उद्देश्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की समस्याओं का निराकरण करवाना रहा है। वर्तमान में जिला स्तर पर संघ में करीब 930 सदस्य हैं। इस साल पहली बार निर्वाचन प्रक्रिया से संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव होग रहा है। इससे पहले तक केवल मनोनयन के जरिए ही अध्यक्ष चुने जाते रहे हैं। संघ की नियमावली के अनुसार एक कार्यकारिणी की अवधि 3 वर्ष है, लेकिन बीते 8 वर्षों से अजय प्रताप सिंह परिहार मनमानी करते हुए स्वयंभू अध्यक्ष बना रहा।

संघ के सदस्यों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि वर्तमान में अजय प्रताप सिंह परिहार तोकापाल विकासखंड के आम बारूपाटा में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक (आरएचओ) के पद पर पदस्थ रहा है। अनुकंपा से मिली नौकरी में पदस्थापना के बाद से ही वह विवादों से घिरा रहा, लेकिन हर बार अपने पद का रूतबा बताकर कार्रवाई से बचता रहा। इसके अलावा आरएचओ के पद पर नियुक्ति के लिए उसके पास अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता भी नहीं है। सदस्यों ने बताया कि आरएचओ के पद के लिए विज्ञान विषय से 12वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है, जबकि अजय प्रताप सिंह परिहार ने कला विषय से 12वीं उत्तीर्ण की है।

सदस्यों ने ये भी बताया कि सरकारी नौकरी में रहने के दौरान कोई भी कर्मचारी दूसरे स्रोतों से आय अर्जित नहीं कर सकता, इसके बावजूद उसके नाम पर बस्तर परिवहन संघ में कई ट्रकें पंजीकृत है और इससे सरकारी नौकरी से मिलने वाले वेतन के इतर वह परिवहन व्यवसाय से भी आय अर्जित कर रहा है। ऐसे और कई गंभीर मामले हैं, जिन्हें आधार बनाकर कलेक्टर ने सीएमएचओ को उसे निलंबित करने का आदेश जारी किया।

संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों ने ये भी आरोप लगाया है कि स्वयंभू अध्यक्ष रहे अजय प्रताप सिंह परिहार ने उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित भी करता आ रहा है, जिसकी शिकायत भी स्वास्थ्य विभाग से लेकर जिले के बड़े अफसरों और कलेक्टर तक से की जा चुकी है। उसकी प्रताड़ना से ही त्रस्त होकर प्रताड़ित सदस्यों के समर्थन के चलते प्रतिद्वंद्वी के रूप में रीमा दानी ने अध्यक्ष पद का नामांकन भरा।

संघ के सदस्यों से पता चला कि लंबे समय से अजय प्रताप सिंह परिहार स्वयंभू अध्यक्ष बनकर स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए परेशानी ही खड़ा करता रहा है। इसके चलते ही संघ में चुनाव की मांग उठी है, जिसके बाद अब लोकतांत्रिक तरीके से मतदान के जरिए अध्यक्ष पद का चुनाव हो रहा है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि अध्यक्ष पद की प्रतिद्वंद्वी रीमा दानी की निलंबित कर्मचारी अजय प्रताप सिंह परिहार की दावेदारी पर आपत्ति पर चुनाव अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं।यदि चुनाव अधिकारी अजय प्रताप सिंह परिहार की दावेदारी को रद्द नहीं करते हैं तो निलंबित कर्मचारी को संघ के सदस्यों का कितना समर्थन मिलेगा।
सदस्यों ने बताया कि पहले चुनाव की तारीख 20 अप्रैल चुनी गई थी लेकिन चुनाव अधिकारी ने ईस्टर का हवाला देते हुए तारीख आगे बढ़कर 23 अप्रैल कर दी,अब 23 अप्रैल कार्य दिवस का दिन है ऐसे में मतदान करवाने से स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों को तकलीफो का सामना करना पड़ सकता है यहां तक चुनाव के लिए किसी रूम की भी व्यवस्थता नहीं की गई है ऐसी असुविधाओं के बीच चुनाव कैसे कराया जा सकता है।

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