आर एस भटनागर
जगदलपुर। शहर में अमृत मिशन के तहत घर-घर दिन के चौबीस घंटे पानी पहुंचाने की केंद्र की योजना पर सालों से काम चल रहा है, लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया जा सका है। इन हालातों में घर-घर दिन के चौबीसों घंटे पानी पहुंचने को लेकर अब भी लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है। अमृत मिशन के काम को पूरा करने को लेकर लगातार लेटलतीफी की जा रही है। इसके साथ ही अब अमृत मिशन के लिए बनाई गई पानी की टंकियां भी बन चुकी हैं, लेकिन सालों बाद भी इसे चालू नहीं किया जा सका है।
पानी की टंकियों के निर्माण में भी गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते दिख रहे हैं। दरअसल शहर में अमृत मिशन के तहत 5 ओवरहैड टैंक का निर्माण किया गया है और धरमपुरा में एक ओवरहैड टैंक निर्माणाधीन है। इनमें से दो ओवरहैड टैंक करीब 3 साल पहले बन चुके हैं, लेकिन इनका उपयोग ही शुरू नहीं किया जा सका है। इन हालातों में लोगों को अमृत मिशन की शुरूआत के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
शहर के पुराने डंपिंग यार्ड में 49 लाख रूपए की लागत से बनाए गए 8.50 लाख लीटर की क्षमता वाले ओवरहैड टैंक कर निर्माण 3 साल पहले किया जा चुका है। इस ओवरहैड टैंक के निर्माण में भारी भ्रष्टाचार किया गया है। भ्रष्टाचार का आलम इसी से पता चलता है कि ओवरहैड टैंक में जगह-जगह लोहे के सरिए बाहर निकल गए हैं। वहीं गुणवत्ता को भी सामान्य रूप से देखी जा सकती है।
एक्सप्रेस एमपीसीजी की टीम ने जब इस ओवरहैड टैंक का निरीक्षण किया तो पाया कि टैंक की सीढ़ियों का निर्माण केवल खानापूर्ति के लिए किया गया है। सीढ़ियों पर जिस कॉन्क्रीट का उपयोग किया गया है, उसकी गुणवत्ता भी काफी ज्यादा खराब है। वहीं इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
इधर टैंक के नीचे बनाए गए वॉल्व चैंबर के लिए 4 से 5 गड्ढे बनाए गए हैं, जिसे करीब 8 से 9 फीट तक गहरा बनाया गया है। जिस जगह पर ओवरहैड टैंक बनाए गए हैं, वह रिहायशी इलाका है, जहां बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं। इन वॉल्व चैंबर को न तो ढंका गया है और न ही इसकी कोई निगरानी ही की जा रही है। ऐसे में खुले वॉल्व चैंबर हादसों का कारण बन सकते हैं।
जिस जगह पर ओवरहैड टैंक बनाया गया है, वहां नगर निगम का पुराना डंपिंग यार्ड था, जहां निगम शहर का कचरा डंप करता था। यहां रोजाना बड़ी संख्या में गौवंश मौजूद रहते हैं। ओवरहैड टैंक के नीचे खुले वॉल्व चैंबर गौवंशों के लिए भी खतरा बन सकते हैं। चूंकि वॉल्व चैंबर करीब 8 से 9 फीट गहरे हैं, ऐसे में गौवंशों के इसमें गिर जाने के बाद उन्हें निकाल पाना खासा मुश्किल भरा हो सकता है। जहां उनकी मौत तक हो सकती है। इन संभावनाओं पर अब तक नगर निगम ने कोई भी कार्रवाई नहीं की है।
इस मामले को लेकर नगर निगम के ईई अजीत तिग्गा को मौके पर बुलवाकर एक्सप्रेस एमपीसीजी की टीम ने पूरे निर्माण का मुआयना करवाया। उन्होंने कहा कि ओवरहैड टैंक के निर्माण के बाद नीचे बनाए गए वॉल्व चैंबर को ढक्कन लगाकर बंद करना था। इसके साथ ही ओवरहैड टैंक क्षेत्र की घेराबंदी भी की जानी थी, लेकिन ये काम ठेकेदार ने पूरा नहीं किया है। उन्होंने जल्द काम पूरा करने की बात कही है।
ईई अजीत तिग्गा ने बताया कि पूर्व में ओवरहैड टैंक का निर्माण गोंडवाना इंटरप्राइजेस को दिया गया था। इस कंपनी को काम से बाहर कर दिया गया। इसके बाद निर्माण का ठेका चंद्रा इंटरप्राइजेस को दे दिया गया, जिसने काम पूरा किया है।
अब नगर निगम की निर्माण को लेकर कार्यशैली पर शुरू से ही सवाल खड़े होते रहे हैं। कई ठेकेदारों को लेटलतीफी के बावजूद निगम प्रशासन उन पर मेहरबान रहा है। ठेकेदारों की मनमानी पर नगर निगम प्रशासन का मौन समर्थन रहा है। ऐसे में शहर में चल रहे गुणवत्ताहीन निर्माण पर कोई भी कार्रवाई करने से नगर निगम बचता दिख रहा है।
