अंचल में धूमधाम से मनाया गया भाईदूज का पर्व –भाई-बहन के पवित्र प्यार का प्रतीक है भाईदूज त्यौहार

भरत भारद्वाज

फरसगांव :- दीपावली के पांच पर्वो की लड़ी में शामिल भाईदूज का पर्व 15 नवम्बर बुधवार को क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। इस दिन सुबह ही घरों में इस पर्व की धूम शुरू हो गई थी, बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक कर जहां उनकी लंबी आयु की कामना की और भाइयों को उपहार भेंट कर उनके प्रति अपने प्रेम को दर्शाया। परंपरा के अनुसार बहनों ने भाइयों को तिलक लगाने के बाद नारियल आदि भी दिए। इस पर्व पर4 शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति रहा होगा जिसके माथे पर लाल रंग का तिलक न सजा हो अन्यथा सबके माथे पर लगे टीके भाई दूज पर्व की महत्ता का अहसास करा रहे थे। परिवार के जहां बड़े सदस्यों ने इस पर्व की परंपरा को निभाया वहीं छोटे-छोटे बच्चों पर भी इस पर्व का रंग खूब देखा गया। बहन-भाई के अटूट प्रेम का प्रतीक भाई दूज का पर्व जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ परंपरागत तरीके से मनाया गया।

–भाईदूज पर्व की मान्यता है–

भाई दूज या भैया दूज का त्‍योहार रक्षाबंधन की तरह भाई-बहन के पवित्र प्रेम और समर्पण का प्रतीक है । इस दिन बहने अपने भाई को तिलक लगाकर उनके कलाई में रक्षा सूत्र बांधती हैं, विवाहित महिलाएं अपने भाइयों को घर पर आमंत्रित कर उन्‍हें तिलक लगाकर भोजन कराती हैं. वहीं एक ही घर में रहने वाले भाई-बहन इस दिन साथ बैठकर खाना खाते हैं। मान्‍यता है कि भाई दूज के दिन अगर भाई-बहन यमुना किनारे बैठकर साथ में भोजन करें तो यह अत्‍यंत मंगलकारी और कल्‍याणकारी होता है ।

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