संस्कार का संदेश दे रहा वार्ड 14 का पांडेय* *परिवार बुजुर्ग पिता की सेवा को बनाया दिनचर्या* *बच्चे भी वृद्धाश्रम में मनाते हैं अपना जन्मदिन*

विनोद जैन

बालोद। कहा जाता है कि हर व्यक्ति का पहला कर्तव्य माँ बाप की सेवा होनी चाहिए इन्ही में 84 कोटि के देवी देवताओं का वास होता है माता पिता की सेवा से बड़ा कोई धर्म नही है परन्तु आज के इस पाश्चात्य संस्कृति में लोग चकाचौंध की दुनिया मे अपने झूठे दिखावा के लिए बुजुर्ग मातापिता को किसी वृद्धाश्रम में छोड़ देते हैं लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो ऐसे लोगो को संदेश देने की हिम्मत रखते हैं इसी प्रकार बालोद के आमापारा में निवासरत सेवानिर्वित्त शिक्षक डी एन पांडेय का परिवार रहता है जो समाज में बुजुर्गों के सेवा का संदेश दे रहा है। बालोद के शासकीय बालक हाई स्कूल में डीएन पांडेय शिक्षक एवं प्राचार्य रहे हैं शिक्षक भी ऐसे जो उस समय के अध्ययनरत बच्चों को स्कूली शिक्षा के साथ साथ अनुशासन एवं संस्कार का सिख भी देते थे बालोद का हर नागरिक उनके अनुशासन को आज भी याद करता है आज पूर्व शिक्षक डीएन पांडेय अस्वस्थ्य हैं परन्तु उनकी अस्वस्था के कारण पूरा परिवार दिनरात उनकी सेवा में लगा रहता है वहीं पाण्डेय सर की बिस्तर में दैनिक क्रियाओं की साफ सफाई से लेकर ताजी हवा के बीच ले जाने को परिवार ने अपने दिनचर्या में शामिल कर लिया है परिवार के इस सेवा से वह बहुत खुश और स्वस्थ रहते हैं उनके परिवार के बच्चों में भी संस्कार इस तरह है कि भौतिक सुख सुविधाओं की चकाचौंध से दूर अपना जन्मदिन वृद्धाश्रम में मनाते हैं। डीएन पाण्डेय सर की प्रकृति के प्रति प्रेम किसी से छुपा नही है जब वह प्राचार्य थे तब बालक हाई स्कूल की हरियाली देखते ही बनती थी तब तत्तकालीन मध्यप्रदेश के समय मे इस विद्यालय को सबसे सुंदर विद्यालय का खिताब भी हासिल हुआ था इसी को देखते हुए घर के एक हिस्से को उनके पुत्र रविप्रकाश पांडेय द्वारा गार्डन का रूप दे दिया गया है, जहां प्रतिदिन सुबह उन्हें कंधे का सहारा देकर मॉर्निंग वॉक कराया जाता है।
बालोद के से.नि. पूर्व प्राचार्य डीएन पांडेय के पुत्र रवि प्रकाश पांडेय समाज के लिए संस्कार, सहिष्णुता व मानवता का संदेश दे रहे हैं। बुजुर्ग पिता की सेवा कर एक अनुकरणीय व प्रेरक संदेश दे रहे हैं। व्यापारी व समाजसेवी होने के नाते वे काफी व्यस्त रहते हैं, लेकिन पिता की सेवा के लिए जो दिनचर्या तय कर लिए हैं उसे वह नहीं भूलते। रवि प्रकाश पांडेय अपने हाथों से पिता की दैनिक क्रियाओं की साफ सफाई से लेकर उन्हें नहलाने तक का कार्य करते हैं, फिर उन्हें अपने कंधों पर हाथ का सहारा देकर अपने घर में बने गार्डन में ताजी हवा के बीच ले जाते हैं। कुछ देर तक मॉर्निंग वॉक करते हैं फिर झूला भी झूलते हैं। न केवल रवि प्रकाश पांडेय ही बल्कि उनकी पत्नी ऋचा पाण्डेय व दोनों बच्चे भी पूरी तरह से इस संस्कार को निभा रहे हैं, बुजुर्ग और अस्वस्थ अपने दादा को देखते ही नाती आशुतोष पांडेय व आरुषि पांडेय भी दादा का सहारा बन जाते हैं

*आर्ट ऑफ़ लिविंग से भी जुड़े हैं रवि प्रकाश पांडेय*

रवि प्रकाश पांडेय गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी के आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से जुड़े हैं, वे स्वयं प्रतिदिन योग, ध्यान, साधना करते हैं। इसके अलावा वे संस्था के योग शिक्षक के रूप में कई जगहों पर जाकर योग का महत्व बताते हैं। बालोद के जेल में हो या जिला चिकित्सालय में या फिर सरकारी कार्यक्रमों में हो उन्हें योग का महत्व बताने आमंत्रित किया जाता है। श्री श्री रविशंकर जी की प्रेरणा से ही उन्होंने योग को अपना जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया है। रवि प्रकाश पांडेय अपने घर के गार्डन की दीवारों में योग की विभिन्न मुद्राओं का चित्रण भी कराया है। गार्डन में आने वाले लोग न केवल प्रकृति की अनुभूति करते हैं, बल्कि योग क्रियाओं से भी परिचित होते हैं।
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समाजसेवी के रूप में है पहचान
रवि प्रकाश पांडेय न केवल अपने वार्ड में बल्कि पूरे बालोद में समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं। यह संस्कार भी उन्हें अपने माता पिता से मिला है। वह हर किसी के दुख सुख में निश्चित रूप से शामिल होने की कोशिश करते हैं। पिता की सेवा को वह अपना धर्म समझ कर लोगों के बीच प्रेरणा के लिए पहुंचाते रहते हैं। इन्हीं सेवा भाव के कारण ही उन्हें प्रांतीय ब्राह्मण समाज द्वारा श्रवण कुमार सम्मान भी दिया गया है।

*बेटे ने वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के बीच मनाया जन्मदिन*

रवि प्रकाश पांडेय द्वारा दिया गया संस्कार बच्चों में भी कूट-कूट कर भरा हुआ है। रायपुर में पढ़ाई कर रहे रवि प्रकाश पाण्डेय के बेटे आशुतोष पांडेय
का बीते दिनों जन्मदिन था। जन्मदिन के दिन वह रायपुर में ही था, उन्होंने अपना जन्मदिन अपने दोस्तों के बीच नहीं मनाया बल्कि वृद्ध आश्रम में पहुंचकर बुजुर्गों के बीच अपना जन्मदिन मनाया, वहां बुजुर्गों को फल बांटकर व पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लिया। यह संस्कार के ही कारण है कि उन्होंने घर से बाहर रहते हुए भी अपने दोस्तों के बीच चकाचौंध में जन्मदिन न मना कर बुजुर्गों के बीच मनाया।

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