
भरत भारद्वाज
फरसगांव – कोंडागांव जिले के फरसगांव ब्लॉक अंतर्गत ग्राम गट्टीपलना प्लाटपारा में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में 15 बच्चे हैं लेकिन बच्चे केंद्र नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यकर्ता भर्ती में गड़बड़ी की गई है। ग्रामीणों के अनुसार भूतपूर्व कार्यकर्ता बसंती की बेटी का चयन होना था, लेकिन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी द्वारा गलत तरीके से भर्ती प्रक्रिया कर दूसरे महिला का पदस्थ किया गया है। जिसके चलते ग्रामीण नाराज है । ग्रामीण अपने अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र नहीं भेज रहे है। वही बच्चों के आंगनबाड़ी केंद्र न आने पर जिम्मेदार अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे है। अगर ऐसी स्थित रही तो नन्हे नन्हे बच्चों का भविष्य का क्या होगा। बच्चों को बचपन में जो शिक्षा मिलनी चाहिए वे उससे वंचित रह जाएंगे। विभाग द्वारा इस समस्या का कोई समाधान नहीं किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि प्लाटपारा के आंगनबाड़ी केंद्र में कई वर्षो से स्व बसंती मरकाम कार्यकर्ता के रूप में कार्य कर रही उसकी मौत 03 जुलाई 2024 को हुई । जिसके बाद आनफानन में सुपरवाइजर गायत्री ठाकुर ने 05 जुलाई को वेकेंसी निकलकर प्रमोशन में गांव के ही दूसरे पारा की सहायिका सविता शोरी को प्रमोशन कर। प्लाटपारा के आंगनबाड़ी में कार्यकर्ता के पद में पदस्थ किया गया। ग्रामीणों की मांग थी कि आंगनबाड़ी में भूतपूर्व कार्यकर्ता स्व बसंती की बेटी का चयन हो । ग्रामीणों के द्वारा विरोध करने पर प्रमोशन रद्द कर सविता शोरी को हटा दिया गया। जिसके बाद दिसम्बर में दुबारा वेकेंसी निकाला गया। जिसमें गांव के नीलम मरकाम के साथ दो अन्य महिला ने फॉर्म भरा था , लेकिन अचानक इन तीनों की जगह अन्य दूसरे महिला अनुसुइया मरकाम का कार्यकर्ता के पद में चयन हो गया। 07 दिसम्बर से अनुसुइया ने अपना पद ग्रहण भी कर लिया। जिससे ग्रामीण नाराज है और उसका विरोध कर रहे है। ग्रामीणों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई है। जिसके चलते ग्रामीण 07 दिसम्बर से ग्रामीण अपने अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र नहीं भेज रहे है। ग्रामीणों ने कहा कि जब तक अनुसुइया मरकाम आंगनबाड़ी में रहेगी तब तक वे अपने बच्चों को नहीं भेजेंगे।
सुपरवाइजर देती है धमकी –
ग्रामीण महिला उपासीन और कौशल्या मरकाम ने बताया कि जब इस भर्ती का विरोध करने पर सुपरवाइजर सावित्री ठाकुर के द्वारा गांव की महिलाओं को धमकी दिया गया। सुपरवाइजर ने गांव की महिलाओं का महतारी वंदन और चावल को बन्द करवाने की धमकी देती है।
कार्यकर्ता ने 6 माह तक खुद के घर से राशन से बच्चों को खिलाया
आंगनबाडी केंद्र की सहायिका जुगो बाई ने बताया कि केंद्र में करीब 15 बच्चे हैं लेकिन दिसम्बर माह से कोई भी बच्चा केंद्र नहीं आ रहा है। जब मैं गांव में बच्चों को लेने जाती हु तो उनके परिजन उन्हें नहीं भेजते है। बगल ने स्थित स्कूल की शिक्षिका अपने बच्चों को स्कूल लाती है उनके ही बच्चे केंद्र में आते है। जो कि दूसरे गांव के है। बाकी प्लाटपारा के बच्चे नहीं आते है। सहायिका ने बताया कि स्व बसंती की मौत के बाद से वे खुद अपने घर के राशन से बच्चों को खाना खिलाने का काम किया है। विभाग के द्वारा कोई भी चीज उपलब्ध नहीं करवाया गया है। अधिकारी के द्वारा समय समय पर निरीक्षण भी नही करते है। अभी वर्तमान कार्यकर्ता के ज्वाइनिंग के बाद से अधिकारी आना जाना कर रहे है।
नियम के तहत हुई है कार्यकर्ता की भर्ती –
फरसगांव परियोजना अधिकारी वृंदा देवांगन से पूछने पर उन्होंने बताया कि गट्टीपलना के ग्रामीणों का आरोप गलत है हमने प्लाटपारा के आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता की भर्ती सही नियम से हुई है। ग्रामीण की मांग थी कि भूतपूर्व सहायिका की मौत के बाद मृतिका की बेटी को कार्यकर्ता बनाया जाय, लेकिन हमारे विभाग में अनुकम्पा नियुक्ति का नियम नहीं है। हमने पैनल टु पैनल शासन के नियमों के अनुसार विज्ञापन निकलवाकर आवेदन आमंत्रित किया। जिसमें प्रथम नियुक्ति हुई है उसे नियुक्ति आदेश जारी किया है। और वह अभी कार्य कर रही है। जिससे ग्रामीणों को आपत्ति है।
बच्चों में कैसे होगा पोषण और शिक्षा में विकास –
आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कई तरह की सुविधाएं मुहैया कराते हैं. इन सुविधाओं से बच्चों का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, सामाजिक, और रचनात्मक विकास होता है. आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को पोषण, शिक्षा, और स्वास्थ्य सेवाएं मिलती हैं। लेकिन जब बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र ही नहीं जायेगे तो उन्हें ये सब मिलने वाली सुविधा कैसे प्राप्त होगी। यह स्थित गट्टीपलना प्लाटपारा में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों के साथ ऐसे स्तिथि होने के नौबत आने लगी है। लेकिन जिम्मेदार परिजन, अधिकारी द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। अधिकारी द्वारा बच्चों को केंद्र तक लाने कोई भी प्रयास नहीं किया जा रहा है।
