बस्तर में खंडपीठ नहीं तो आंदोलन: सर्व समाज का ऐलान, सांसद संसद में उठाएंगे मुद्दा

चंद्रहास वैष्णव

बस्तर संभाग में उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापित करने की मांग अब तेज होती जा रही है। आदिवासी बाहुल्य और भौगोलिक रूप से विस्तृत इस क्षेत्र के लोगों को न्याय के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर जाना पड़ता है, जिससे उन्हें लगातार आर्थिक, भौतिक और समय संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा सहित बस्तर के दूरस्थ इलाकों के लोगों को छोटी-छोटी कानूनी प्रक्रियाओं के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए बस्तर जिला अधिवक्ता संघ और बस्तर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने संयुक्त रूप से आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है।

बार एसोसिएशन और चेम्बर ऑफ कॉमर्स के तत्वावधान में चेम्बर ऑफ कॉमर्स भवन में एक संभागीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें आंदोलन की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में सर्वसम्मति से शांतिपूर्ण और अहिंसात्मक आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया गया, ताकि सरकार तक क्षेत्र की मांग को प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सके।

बैठक में उपस्थित बस्तर सांसद महेश कश्यप ने जगदलपुर में उच्च न्यायालय की खंडपीठ (High Court Bench) स्थापित करने की मांग को लेकर कहा कि बस्तर क्षेत्रफल की दृष्टि से काफी बड़ा और जनजातीय बहुल क्षेत्र है। न्यायिक व्यवस्था की कमी के कारण स्थानीय लोगों को लंबी दूरी और भाषाई बाधाओं जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर मुख्यमंत्री, राज्यपाल, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखा जाएगा।
संसद में आवाज: सांसद ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे बस्तर के इस महत्वपूर्ण मुद्दे को संसद के शून्यकाल (Zero Hour) में प्रमुखता से उठाएंगे।

तो वहीं जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष विक्रमादित्य झा ने जगदलपुर में हाई कोर्ट खंडपीठ की मांग को लेकर कहा कि
बैठक में बस्तर संभाग के 42 विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ सांसद महेश कश्यप, पूर्व विधायक लखेश्वर बघेल, विक्रम मंडावी और रेखचन्द जैन जैसे दिग्गज जनप्रतिनिधि शामिल हुए अब एक विशेष टीम का गठन किया जाएगा जो पूरे संभाग का दौरा कर इस आंदोलन को और मजबूती देगी।
झा ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट बिलासपुर की दूरी के कारण बस्तरवासियों का काफी समय, पैसा और ऊर्जा बर्बाद होती है। खंडपीठ की स्थापना से न्याय प्रक्रिया सुलभ होगी।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर खंडपीठ होने से लोगों में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, जो फिलहाल न्याय प्रणाली की जटिलता के कारण कम है।

बस्तर में हाई कोर्ट खंडपीठ की मांग तेज: श्याम सोमानी
बस्तर चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्याम सोमानी ने जगदलपुर में हाई कोर्ट खंडपीठ की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया है।
सोमानी ने कहा कि 2011 के बाद अब परिस्थितियां बदली हैं। बस्तर से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और यह क्षेत्र तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। बढ़ते उद्योग और व्यापार के साथ न्यायिक सुविधाओं का विस्तार अनिवार्य है।
उन्होंने जोर दिया कि न्याय के लिए बस्तरवासियों को 500-700 किमी दूर बिलासपुर जाना पड़ता है, जिससे समय और पैसे की भारी बर्बादी होती है।उन्होंने संभाग के सभी 12 विधायकों और सांसदों से इस मुद्दे को सदन में उठाने की अपील की है।
सोमानी ने स्पष्ट किया कि यदि शांतिपूर्ण तरीके से मांग पूरी नहीं हुई, तो बस्तरवासी उग्र आंदोलन के लिए भी बाध्य होंगे।

इस महत्वपूर्ण बैठक में बस्तर सांसद महेश कश्यप, बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल, बीजापुर विधायक विक्रम मांडवी, जगदलपुर के पूर्व विधायक रेखचंद जैन, बार एसोसिएशन अध्यक्ष विक्रमादित्य झा तथा बस्तर चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष श्याम सोमानी सहित विभिन्न समाजों के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक में उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों और समाज प्रमुखों ने एक स्वर में कहा कि बस्तर में हाईकोर्ट की खंडपीठ की स्थापना से क्षेत्र के लोगों को त्वरित और सुलभ न्याय मिल सकेगा, जिससे न्यायिक व्यवस्था मजबूत होगी और आम जनता को राहत मिलेगी।